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भारतीय कला ने विदेशी पर्यटकों का मोहा मन, छोटी चौपाल पर जमा रंग

6 वर्ष पहले
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फरीदाबाद। सूरजकुंड मेले में सतरंगी संस्कृति का रूप देखने को मिल रहा है। मुख्य व छोटी चौपाल पर देसी व विदेशी लोक कलाकारों की प्रस्तुति समा बांध रही है। गुरुवार को बड़ी संख्या में पर्यटक मेले का लुत्फ उठाने आए। चौपाल पर पैर रखने के लिए भी जगह नहीं बची थी। बड़ी संख्या में जिले के निजी और सरकारी स्कूलों के छात्र-छात्राएं भी मेला देखने आए। उन्होंने सूरजकुंड मेला प्राधिकरण की ओर से आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया। मेले में पंजाबी, राजस्थानी, जम्मू कश्मीर और दिल्ली के परिधानों की धूम मची हुई है। विभिन्न तरह की आध्यात्मिक पेंटिंग भी पर्यटकों को लुभा रही हैं।

बिहू पर थिरके पर्यटक

भले ही भाषा पर्यटकों को समझ में नहीं आ रही है। लेकिन धुन पर पैर खूब थिरके रहे हैं। चौपाल पर जब विश्व प्रसिद्ध बिहू नृत्य असम से आए कलाकारों ने प्रस्तुत किया तो रिदम पर सुध-बुध खो पर्यटक थिरकने लगे। विदेशी पर्यटक भी खूब थिरकते नजर आए।

विदेशी कलाकारों ने मोहा मन

चौपाल पर विदेशी लोक कलाकारों की प्रस्तुति देखते बन रही है। कजाकिस्तान, बेलारूस, किर्गिस्तान, लद्दाख, उड़ीसा के कलाकारों ने समा बांध दिया। सबसे पहले कजाकिस्तान के लोक कलाकारों ने शादी आदि समारोह में पेश होने वाले पारंपरिक गीतों पर नृत्य पेश कर अपने साथ सभी को खूब थिरकाया। पारंपरिक वेशभूषा में सजी-धजी कलाकार पर्यटकों को आकर्षित कर रही थीं। गाने के बोल के साथ पर्यटक भी खूब झूमे। इसके बाद बेलारूस के कलाकारों ने खुशी में गाए जाने वाले गीत प्रस्तुत किए। इसमें कलाकारों का जोश देखते बन रहा था। किर्गिस्तान के कलाकारों ने समा बांध दिया। वे मेले में पर्यटकों के बीच आकर्षण के केंद्र बने हुए हैं। सभी ने खूब मस्ती की। उज्बेकिस्तान के कलाकारों ने लोक नृत्य प्रस्तुत किया। इनके गीतों पर विदेशी व देशी पर्यटक झूमते दिखे।

छोटी चौपाल पर जमा रंग

छोटी चौपाल पर कलाकारों ने जमकर मस्ती की। पर्यटकों के लिए तंबोला आदि प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। यहां विभिन्न राज्यों से आए लोक कलाकारों ने भी प्रस्तुति दी। थीम स्टेट छत्तीसगढ़ के कलाकारों ने लोक संस्कृति का जलवा बिखेर सभी का भरपूर मनोरंजन किया। छत्तीसगढ़ का लोहटी बाजा नृत्य का प्रदर्शन भी कलाकारों ने किया। चर्सिया नृत्य की धूम भी देखने को मिली। इसे लद्दाख में किया जाता है।

सार्क के स्टॉलों पर उमड़ी भीड़

विभिन्न देशों से आए शिल्पकार भी आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। गुरुवार को सार्क के स्टॉलों पर भीड़ थी। उज्बेकिस्तान, रवाना, अजरबेजान, लेबनान के स्टॉलों पर बड़ी संख्या में पर्यटक खरीदारी करते दिखे। बसंतकुंज से मेला देखने आए कार्तिक ने बताया कि सार्क स्टॉलों में काफी वैरायटी है। ये देश के विभिन्न राज्यों से आए शिल्पकारों से सस्ती सामाग्री दे रहे हैं। मुख्य चौपाल के पीछे सार्क सहित अन्य देशों का स्टॉल लगा हुआ है। जहां विभिन्न देशों के पारंपरिक शिल्प कला से रूबरू हो सकते हैं।

छात्रों ने प्रतियोगिताओं में जमाए रंग

सूरजकुंड मेला प्राधिकरण द्वारा स्कूली छात्राओं के लिए ड्राइंग प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इसमें बड़ी संख्या में जिले के निजी और सरकारी स्कूलों के छात्रों ने भाग लिया। प्रतिदिन छात्रों के लिए विभिन्न तरह की प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है। इसमें बड़ी संख्या में छात्र भाग ले रहे हैं। छात्रों को मेला संस्कृति से जोड़ने के लिए इस तरह का प्रयास किया जाता है।
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