फरीदाबाद। के करेगा ये बंदूक-संदूक से छोरी को खिला कै, चूल्हा चौका सिखा ससुराल में काम आवे गा से… ऐसे ही ताने मिलते थे एशियाड 2014 में कांस्य पदक विजेता फरीदाबाद की शूटर खिलाड़ी श्वेता चौधरी को। श्वेता ने चोट से वापसी करते हुए पहली दफा इंडिविजुअल वूमेन कैटेगरी में ब्रांज मेडल जीत देश व जिले का नाम रोशन किया है। इस खेल को फरीदाबाद में शुरू करने वाला पहला परिवार भी श्वेता का है। इस परिवार ने जिले में तो इस खेल को उठाया ही हरियाणा में भी इस खेल को सम्मानित दर्जा दिलाने में भी अहम रोल अदा किया। अब 1200 खिलाड़ी प्रदेश में इस खेल को खेल रहे हैं। दैनिक भास्कर ने श्वेता और श्वेता के परिवार से खास बातचीत में इन पहलुओं को जाना।
इन खिलाड़ियों को मिली मदद: अनीसा सैय्यद, अन्नुराज सिंह, हरप्रीत सिंह, राहुल पंवार,
गगन नारंग इस परिवार की मदद से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त करने वाले नाम हैं। जबकि सिरसा के शुभम और विजेंदर सहित सैकडों उभरते खिलाड़ी आज भी परिवार के अहसानमंद हैं।
अनीसा और अन्नुराज सिंह का कहना है कि वे चौधरी परिवार की बहुत शुक्रगुजार हैं। इस परिवार के प्रोत्साहन की बदौलत ही वह अपनी पहली सीढ़ी तय कर सके।
श्वेता का पहला नेशनल गोल्ड: सेक्टर-28 निवासी श्वेता के पिता रमेश चौधरी ने बताया कि पहले वे शौक के तौर पर शूटिंग करते थे। दिल्ली की कर्णी सिंह शूटिंग रेंज ही पूरे देश में एकमात्र उच्चस्तर की शूटिंग रेंज थीं। उनके बच्चे भी उनके साथ शूटिंग में जाते। उन्हें खेल पसंद आने लगा। बच्चों के प्रदर्शन को देख कर उन्हें प्रतियोगिताओं में खेलने की सलाह दी गई। खेल की शुरुआत 1996 से हुई। उस दौरान हरियाणा से एक भी खिलाड़ी इस खेल में मौजूद नहीं था। 1998 में पूरे परिवार ने नेशनल स्तर पर प्रतियोगिता में भाग लिया। मैं तो पदक नहीं जीत सका। लेकिन मेरे दोनों बच्चों श्वेता और तोषिंदर ने गोल्ड मेडल जीते। दोनों को उसी दौरान एयर इंडिया ने हॉयर कर लिया। अब श्वेता ओएनजीसी में लग गई हैं। चौधरी बताते है कि श्वेता के पास इस समय 140 मेडल हैं। जिसमें 37 अंतरराष्ट्रीय और 101 नेशनल स्तर के मेडल हैं। जबकि पूरे परिवार के नाम 225 के लगभग मेडल हैं।
शूटरों की निस्वार्थ मदद करते हैं पापा: श्वेता
श्वेता ने बताया कि उनके पापा ने उनके लिए ही नहीं कई अन्य खिलाड़ियों के लिए भी काफी मेहनत की है। कई संस्थानों में शूटिंग रेंज खुलवाने, अच्छे खिलाड़ियों को बड़े संस्थानों से स्पांसर्स कराने जैसे कामों से वे अपने पापा पर गर्व महसूस करती हैं। अभी भी वे अपने इस काम से पीछे नहीं हटते हैं। शूटर अनीसा सैय्यद के पति मुबारक का कहना है कि चौधरी परिवार की देन है कि फरीदाबाद में इस समय कई संस्थानों में शूटिंग रेंज बनी हैं। बेहतरीन फैसिलिटी नए बच्चों को मिल रही है। श्वेता के पति प्रशांत का कहना है कि श्वेता की वजह से उन्हें भी इस खेल में रुचि होने लगी है। सिरसा से मांगेराम बालियान ने बताया कि वे इस परिवार के बहुत शुक्रगुजार हैं। उनके बेटे के टैलेंट काे देख किसी भी प्रकार की कमी उसे न हो। इसके तहत ही रमेश चौधरी ने उन्हें स्पांसर्स दिलाए। इस वजह से मेरा बेटा शुभम नॉर्थ जोन, स्टेट एवं हरियाणा ओलंपिक में गोल्ड हासिल कर सका है।
श्वेता की खास उपलब्धियां
एमए इंग्लिश, एमबीए। 2004 में भीम अवार्ड। एशियन शूटिंग चैंपियनशिप 2012 में 10मी. एयरपिस्टल में गोल्ड, एशियन एयरगन 2013 में सिल्वर, एशियन एयरगन 2014 में ब्रांज, कॉमनवेल्थ शूटिंग चैंपियनशिप 2010 में 3 गोल्ड, एसएएफ शूटिंग 2008 में 2 गोल्ड, एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स 2006 में सिल्वर मेडल।
फोटो- श्वेता चौधरी द्वारा जीते गए मेडल।