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सरकारी स्कूल गोद लेने की मुहिम फ्लाॅप, शिक्षक संगठनों ने विरोध जताया

7 वर्ष पहले
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फरीदाबाद। गवर्नमेंट स्कूलों की दशा सुधारने के लिए उद्यमियों द्वारा गोद लेने की योजना परवान नहीं चढ़ सकी है। दो साल पहले इसे जोर-शोर से शुरू किया गया था। लेकिन आज तक एक भी स्कूल को गोद नहीं लिया जा सका है। शिक्षा विभाग की तत्कालीन प्रधान सचिव ने स्कूलों की दशा में सुधार के लिए उद्यमियों से अपील की थी कि वे एक स्कूल को गोद लें। इसे लेकर एक दौर की बैठक भी हुई थी। बाद में यह सिरे नहीं चढ़ सकी।
एक बार फिर से निजी हिस्सेदारी देकर स्कूलों को सुधारने की कवायद शुरू करने की बात चल रही है। इसके तहत 25 फीसदी हिस्सेदारी मूलभूत सुविधा उपलब्ध कराने के लिए दी जा सकती है। इसे लेकर शिक्षक संगठनों ने विरोध जताया है।
नहीं किया जा सका संपर्क
औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक के बाद विभाग की ओर से किसी तरह का संपर्क नहीं साधा जा सका है। कुछ संगठनों ने प्रयास किया था। लेकिन शिक्षक संगठनों के विरोध के कारण बात सिरे नहीं चढ़ी।

^ मूलभूत सुविधाओं उपलब्ध कराने के लिए प्रयास किया जाता है। सरकारी व निजी स्तर पर किया जा रहा है। हाल ही में एनएच पांच के एक स्कूल में टॉयलेट आदि एक संस्था ने बना कर दिया है। स्कूलों में सामाजिक संगठनों की दिलचस्पी बढ़े, जिससे वे बेहतर शिक्षा व सुविधा देने में मदद करें। यह एक बेहतर प्रयास होगा। स्कूल समाज के लिए ही होता है।
रितु चौधरी, खंड शिक्षा अधिकारी, फरीदाबाद
प्राइवेट हाथों में देने का करेंगे विरोध

राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष चतर सिंह ने बताया कि प्राइवेट हाथों में स्कूल देने की योजना का विरोध करेंगे। यह परंपरा ठीक नहीं है। स्कूल की व्यवस्था दूसरे के हाथों में देने से अव्यवस्था फैलेगी। जिसका नुकसान शिक्षकों के साथ छात्रों को भी उठाना पड़ सकता है।
स्कूलों में सुविधाओं की कमी

- कमरों की हालत खस्ता
- बैठने के लिए बैंच नहीं
- ज्यादातर स्कूल में डेस्क नहीं
- टूटी हुई खिड़कियां
- कमरों में लाइट की व्यवस्था नहीं
- टायलेट की स्थिति दयनीय
- बिजली व पानी की किल्लत