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सुरक्षा से खिलवाड़ : 7 माह बाद भी अधूरा है ऑटो चालकों का वेरीफिकेशन

7 वर्ष पहले
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गुड़गांव। गुड़गांव के एमएनसी में काम करने वाली युवती के साथ शुक्रवार को दुष्कर्म का आरोपी कैब चालक होने की वजह से आसानी से पकड़ा गया। अगर कैब की जगह कोई ऑटो चालक होता, तो उसे पकड़ पाना मुश्किल होता। गुड़गांव पुलिस के पास यहां के सभी ऑटो चालको का ब्योरा नहीं है। जबकि 7 महीने पहले ही तत्कालीन उपायुक्त ने इसके लिए निर्देश जारी किया था, लेकिन यह अब भी अधूरा है। ऐसे में महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल उठना लाजिमी है।
गुड़गांव पुलिस को ऑटो चालकों का वेरीफिकेशन करने के लिए 7 महीने का समय भी कम पड़ गया है।
तत्कालीन डिप्टी कमिश्रर शेखर विद्यार्थी ने 25 जून को पुलिस कमिश्नर आलोक मित्तल की मांग पर धारा 144 लगाते हुए ऑटो ड्राइवरों का पुलिस वेरीफिकेशन करने के लिए कहा था। इसके लिए ऑटो मालिकों को 15 दिन का समय दिया गया था। लेकिन 7 महीने बाद भी पुलिस ने इस मामले में कोई कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। हालात यह है कि शहर के कई थानों में अबतक वेरीफिकेशन शुरू ही नहीं हुआ है। किसी किसी थाने में वेरीफिकेशन के नाम पर खानापूर्ति के लिए एक पुलिसकर्मी को नियुक्त कर दिया गया है।

सिटी, डीएलएफ-1 व 2, पालम विहार, सेक्टर-29, सिविल लाइन, खेड़कीदौला मुख्य सहित अन्य थानों पर यह काम धीमी गति से चल रहा है। सेक्टर-29 थाने से जानकारी मिली कि जब यहां कोई आता है तो कर देते हैं। सुशांत लोक थाने में यह अभी शुरू भी नहीं हुआ है। लगभग यही हालात हर थानों के हैं।

क्यों पड़ी वेरिफिकेशन की जरूरत ‎
जिले में 40 हजार से अधिक ऑटो चल रहे हैं। कई ऑटो मालिकों द्वारा ड्राइवर के रूप में अनजान लोगों की सेवाएं ली जा रही हैं। कई चालकों की पुलिस वेरीफिकेशन नहीं हुई है। इनके पारिवारिक तथा आपराधिक पृष्ठभूमि के बारे में भी छानबीन नहीं की गई है। ऐसी स्थिति में आपराधिक पृष्ठभूमि के व्यक्ति के चालक होने होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

खतरे में महिलाओं की सुरक्षा

गुड़गांव में चल रहे कॉल सेंटरों, मॉल, वाणिज्यिक संस्थानों तथा अन्य जगहों से देर रात तक काफी संख्या में महिलाएं अपने घरों तक जाने के लिए ऑटो का प्रयोग करती हैं। इनसे ऑटो चालक निर्धारित किराए से ज्यादा पैसे ऐंठते हैं और उनके साथ बदसलूकी भी करते हैं। कानून व्यवस्था दुरुस्त रखने तथा महिलाओं के विरुद्ध अपराधों पर अंकुश लगाने की दिशा में ऑटो चालकों का पुलिस वेरीफिकेशन जरूरी है।
आसान नहीं वेरीफिकेशन
तत्कालीन जिला उपायुक्त शेखर विद्यार्थी ने 25 जून को दंड प्रक्रिया अधिनियम 1973 की धारा 144 जिला में लागू करते हुए जिले के सभी ऑटो रिक्शा मालिकों के लिए ऑटो पर रखे गए चालकों की पुलिस वेरीफिकेशन 15 दिन में कराने का आदेश दिया था। चालकों का वर्तमान तथा मूल निवास का पता व नाम फोटो सहित ब्यौरा देना होगा। इसके अलावा उसके नाम, पता व फोटो के साथ दो लोगों की गवाही भी देनी होगी।