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गुड़गांव में छापेमारी, फरार ट्रैफिक इंस्पेक्टर आकाओं की शरण में

7 वर्ष पहले
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गुड़गांवविजिलेंस फरार ट्रैफिक इंस्पेक्टर जय सिंह को पकड़ने के लिए जगह जगह छापेमारी कर रही थी, वहीं आरोपी ने चंडीगढ़ स्थित विजिलेंस ऑफिसरों के सामने सरेंडर कर दिया।। इतना ही नहीं ट्रैफिक इंस्पेक्टर ने अपने केस को गुडगांव विजिलेंस के अधिकार से हटाकर अपने मनमाफिक अधिकारियों के पास जांच को दिलवाने में कामयाबी हासिल कर ली। आश्चर्य यह भी है कि इंस्पेक्टर की गिरफ्तारी भी नहीं दिखाई गई है। गुड़गांव विजिलेंस के पास हाथ मलने के अलावा कोई दूसरा चारा नहीं है। सूत्रों के अनुसार जय सिंह को पहले से ही इन अधिकारियों का सानिध्य मिला हुआ था। जिसके कारण ही विजिलेंस की पकड़ के बाद भी उसकी गिरफ्तारी तो दूर केस को ही यहां से हटा लिया गया।

क्याथा मामला

11सितंबर 2014 को विजिलेंस की टीम ने ट्रैफिक इंस्पेक्टर जय सिंह के ड्राइवर सुखपाल को ट्रकों से हफ्ता वसूली करते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया था। उसके बाद 12 सितंबर को उसे 2 दिन की रिमांड पर लिया गया। रिमांड में पूछताछ के दौरान सुखपाल ने विजिलेंस के सामने कबूल किया कि वह इंस्पेक्टर जय सिंह के साथ मिलकर हर ट्रक चालक से 1500 रुपए वसूली करता है।

पूछताछ में सुखपाल ने यह भी कबूल किया कि जय सिंह ने उसे बताया था कि ट्रकों की वसूली की रकम में से उच्चाधिकारियों तक हिस्सा पहुंचता है। इस कबूलनामे को आधार मानकर विजिलेंस की टीम ने इंस्पेक्टर जय सिंह को गिरफ्तार करने के लिए घर छापेमारी की, लेकिन वह नहीं मिला। पता चला कि इंस्पेक्टर 3 दिन की विभागीय छुट्टी लेकर कहीं बाहर गए हैं। लेकिन जब चंडीगढ़ से उसके सरेंडर करने केस ट्रांसफर के बाबत आदेश आया तो गुड़गांव विजिलेंस को होश उड़ गए। सूत्रों की मानें तो यह भी जानकारी मिली है कि जय सिंह अपने उच्चाधिकारियों से संबंध का फायदा उठाते हुए केस से बरी होने की फिराक में है। जबकि गुड़गांव विजिलेंस के पास उसके खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं। शेषपेज | 15



विजिलेंसइंस्पेक्टर जगदीश सिंह ने बताया कि इंस्पेक्टर जय सिंह के केस को चंडीगढ़ ट्रांसफर कर दिया गया है। इस केस को अब विजिलेंस अधिकारी मनवीर सिंह को सौंप दिया गया है जो पंचकूला हेडक्वार्टर में बैठते हैं। उन्होंने बताया कि उनके पास इंस्पेक्टर जय सिंह के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं, जिसके आधार पर उसे गिरफ्तार करने के लिए छापेमारी की जा रही थी।