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लैंड यूज:19 विभागों ने नहीं दिया जवाब

7 वर्ष पहले
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घाटागांव की जल संरक्षण भूमि को आवासीय क्षेत्र में बदलने के मामले में किसी भी विभाग ने कोर्ट में जवाब फाइल नहीं किया। सोमवार को स्थानीय कोर्ट में इस मामले की सुनवाई थी। कोर्ट ने अब मामले की सुनवाई के लिए 16 फरवरी की तारीख तय की है।

19विभागों को देना था जवाब

17नवंबर 2014 को याचिका पर सुनवाई करते हुए गुड़गांव के सिविल जज सीनियर डिवीजन कुमुद गुगनानी ने 19 विभागों को नोटिस जारी किया था। इन सभी विभागों को इस मामले में 8 दिसंबर को जवाब पेश करने थे। इसमें महानिदेशक टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग सहित क्षेत्रीय निदेशक केंद्रीय भूजल बोर्ड, उप मंडल अधिकारी भूजल सेवा, जिला नगर योजनाकार, गुड़गांव उपायुक्त और डीएलएफ बिल्डर समेत अन्य विभाग शामिल थे। लेकिन किसी भी विभाग ने कोई जवाब नहीं पेश किया।

अबहोगी 16 फरवरी को सुनवाई

इसमामले के याचिका कर्ता के वकील अनिल सुरा के मुताबिक 19 विभागों की ओर से कोई जवाब नहीं आया है। कोर्ट ने अब इस मामले की सुनवाई के लिए 16 फरवरी की तिथि तय की है। अब इस मामले को लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाएगा।

क्या है मामला

घाटागांव की भूमि उपयोग बदलने सिंचाई ड्रेनेज एक्ट के उल्लंघन करने के मामले में गुड़गांव प्रोग्रेसिव फोरम द्वारा गुड़गांव कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि घाटा गांव की झील को बचाने के लिए हरियाणा सरकार की 1972 की अधिसूचना के तहत गैर परिवर्तनीय क्षेत्र घोषित किया गया था। याचिका में यह भी कहा गया था कि सिंचाई विभाग ने आवासीय गतिविधि के लिए इस भूमि का उपयोग बदलने की अनुमति कैसे दी। जबकि यह गांव ढलान पर होने के कारण यहां बाढ़ की स्थिति पैदा हो सकती है। यहां बसाए गए सेक्टर-58 59 की बहुमंजिली फ्लैटों में बाढ़ के पानी के प्रवेश को टाला नहीं जा सकता। संस्था ने आरोप लगाया था कि कि घाटा गांव एक प्राकृतिक जल संरक्षण क्षेत्र है। साथ ही गुड़गांव में घटते भूजल स्तर को रोकने के लिए यह जरूरी है। भूमि उपयोग में परिवर्तन बिल्डरों के फायदे के लिए किया गया है।