गुड़गांव। जिले में 15 से 19 दिसंबर तक सुरक्षित जननी सप्ताह मनाया जाएगा। गुरुवार को उपायुक्त टीएल सत्यप्रकाश ने सेक्टर-31 स्थित एएनएम ट्रेनिंग सेंटर में चिकित्सकों के साथ एक बैठक की। इसमें सभी चिकित्सकों को माता व शिशु मृत्यु-दर में कमी लाने के आदेश दिए गए। डीसी ने सभी चिकित्सकों से कहा कि वे इस सप्ताह के दौरान स्वास्थ्य विभाग के सब-सेंटर, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर पर हाई-रिस्क प्रेगनेंसी की पहचान करें और उन्हें जिला मुख्यालय पर सामान्य अस्पताल में भेजें, ताकि प्रसव के दौरान दोनों माता और शिशु की अच्छे तरीके से देखभाल की जा सके। उन्होंने कहा कि हाई रिस्क प्रेग्नेंसी में प्रसव के दौरान माता या शिशु के मृत्यु की आशंका ज्यादा होती है।
डीसी ने चिकित्सकों को दिया आदेश
उपायुक्त ने कहा कि माता और शिशु के स्वास्थ्य की यदि हम सही ढंग से देखभाल करने में सफल रहते हैं, तो जिला की कम से कम आधी आबादी के स्वास्थ्य का हम ध्यान रख पाएंगे। उन्होंने चिकित्सकों से कहा कि उन्हें ईश्वर की तरफ से मानवता की सेवा का अवसर प्रदान किया गया है। उन्होंने कहा कि हमारे देश के लिए और विशेषकर हरियाणा के लिए यह शर्म की बात है कि आधुनिक युग में भी प्रसव के दौरान माता या शिशु की मृत्यु हो जाती है। उन्होंने कहा कि सामान्य अस्पताल में हाई रिस्क प्रेगनेंसी की देखभाल के लिए एक विशेष यूनिट स्थापित की गई है। पीएचसी तथा सीएचसी से इस यूनिट में आने वाली गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखा जाएगा। यह प्रयास किया जाएगा कि प्रसव के दौरान उनकी या उनके शिशु की मृत्यु न हो और दोनों माता व शिशु स्वस्थ रहें। इसके अलावा, सामान्य अस्पताल में एमआरआई, अल्ट्रासाउंड तथा ब्लड बैंक की भी व्यवस्था है।
हाई रिस्क प्रेग्नेंसी पर नजर
बैठक में सिविल सर्जन डॉ. पुष्पा बिश्रोई ने उपायुक्त को विश्वास दिलाया कि सुरक्षित जननी सप्ताह के दौरान तो सभी चिकित्सक सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करने के लिए काम करेंगे। इस सप्ताह के बाद भी हाई रिस्क प्रेग्नेंसी पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। कोई भी ऐसा केस नजर आने पर संबंधित चिकित्सक द्वारा उसे तत्काल सामान्य अस्पताल में रेफर किया जाएगा।