पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में दूसरे दिन हुई गोद भराई की रस्म
श्रीदिगम्बर जैन बारादरी मंदिर में चल रहे श्री 1008 मज्जिनेन्द्र जिनबिम्ब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में शनिवार को भगवान के गर्भ कल्याणक की पूजा की गई। पूरे दिन चले कार्यक्रम के तहत दोपहर में आकार शुद्धि, गर्व कल्याणक पूजन की गई। भगवान के पिता राजा नाभिराय माता मरूदेवी ने गोद भराई की रस्म के लिए बैंड बाजों के साथ कार्यक्रम स्थल में प्रवेश किया। समारोह में दिल्ली आस-पास क्षेत्र से पधारे श्रद्धालुओं का जैन समाज के पदाधिकारियों ने स्वागत अभिनन्दन किया। शाम को आरती, शास्त प्रवचन, महाराजा नाभिराय का राज दरबार, स्वप्न फल वर्णन, कुमारिकाओं द्वारा तत्व चर्चा, 58 कुमारिकाओं द्वारा मारुदेवी मां की सेवा का प्रदर्शन किया गया। इसी क्रम में रविवार को जन्मोत्सव मनाया जाएगा।
इस अवसर पर उपाध्याय श्री 108 गुप्तिसागर ने बताया कि जन्म से पहले जब भगवान का जीव माता के गर्भ में आता है तो माता मरूदेवी को सोलह स्वप्न आते हैं। उन स्वप्नों का अर्थ पूछने के लिए वे महाराज नाभिराय के दरबार में पहुचती है। महाराज सोलह स्वप्न का सारा वर्णन सुनने के बाद माता को आश्वस्त करते हुए बताते हैं कि आपके गर्भ में किसी महा कल्याणकारी जीव अथवा तीर्थकर प्रभु ने प्रवेश किया है।
उन्होंने आगे बताया कि भगवान के गर्भ में प्रवेश करते ही छप्पन कुमारिया माता मरूदेवी की सेवा के लिए आकाश मार्ग से आती है। इस समस्त चित्रण को जन समुदाय को समझाने के लिए गर्भ कल्याणक का अवसर बनाया जाता है। इस दौरान ब्रहचारिणी सुमन रंजना दीदी द्वारा संस्कारों के महत्व पर प्रवचन हुए। प्रतिष्ठाचार्य पंडित सुधीर मार्तण्ड ने मंत्रों द्वारा सौधर्मेन्द्र रवि जैन, धनपति कुबेर सुरेन्द्र जैन महायज्ञनायक रविन जैन की स्थापना की। जैन समाज के अध्यक्ष नरेश जैन एवं महासचिव अशोक जैन ने गर्भकल्याणक कार्यक्रम से भगवान के सभी जन्म, तप, ज्ञान, मोक्ष कल्याणक की तरफ धीरे-धीरे बढ़ते चले जाएंगे। इस अवसर पर उप प्रधान बिरेन्द्र जैन (बिन्नु), मंत्री अवनीश कुमार जैन, कोषाध्यक्ष शेलेन्द्र जैन, कार्यालय अध्यक्ष पुष्प चन्द जैन, मुनि सेवा समिति के अध्यक्ष देवेन्द्र जैन, महामंत्री मुनेश जैन, नरेश जैन आदि लोगों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।
गुड़गांव. आठदिवसीय श्री 1008 मज्जिनेन्द्र जिनबिम्ब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव विश्व शांति महायज्ञ में पूजा-अर्चना करते हुए श्रद्धालु।