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निजी कंपनियों के सहयोग से जोहड़ का होगा जीर्णोद्धार, बसई से होगी शुरुआत

5 वर्ष पहले
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गुड़गांव। लंबे समय के बाद नगर निगम को तालाबों (जोहड़) के संरक्षण की याद आई है। इसकी शुरुआत बसई स्थित पंचायती जोहड़ से की जा रही है। जीर्णोद्धार एवं मरम्मत कार्य के लिए निगम ने निजी कंपनी से हाथ मिलाया है। शनिवार को बसई में एक विशेष कार्यक्रम के साथ इस कार्य की शुरुआत की जा रही है

दरअसल, गुड़गांव नगर निगम के अंतर्गत लगभग 75 जोहड़ हैं, जिसमें से आधे से अधिक जोहड़ का अस्तित्व खतरे में है। जोहड़ में या तो सीवर का पानी भर रहा है, या फिर लोग कूड़ा डाल रहे हैं। अब देर से ही सही नगर निगम ने तालाबों के जीर्णोद्धार एवं मरम्मत की पहल की है। इसके लिए व्यापक कार्यक्रम तैयार किए जा रहे हैं। इसका शुभारंभ शनिवार को गांव बसई के तालाब से होगा, जिसका उद्घाटन केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय के निदेशक सौरभ जैन करेंगे। इस कार्यक्रम की सीएसआर पार्टनर एक निजी कंपनी है।
प्रशासनकी हर कार्य में निजी कंपनियों को जोड़ने की पहल
इनदिनों गुड़गांव में जागरूकता से लेकर विकास कार्यों तक में निजी कंपनियों का सहयोग लिया जा रहा है। कंपनी की सामाजिक भागीदारी योजना के तहत कंपनियों को जोड़ा जा रहा है। सरकारी स्कूलों में इंफ्रास्ट्रक्चर, ट्रैफिक जागरुकता, ट्रैफिक कंट्रोल, राहगीरी, पिछले सप्ताह शुरू की गई ग्रीन राहगीरी और साइकिल ट्रैक बनाने के कार्य के बाद तालाबों के जीर्णोद्घार के लिए निजी कंपनियों का सहयोग लिया जा रहा है। प्रशासन द्वारा इन कंपनियों को सीएसआर और नॉलेज पार्टनर बनाया जा रहा है। बीते कुछ दिनों लगभग सभी विभागों में इस चलन की होड़ लगी हुई है।
वाटर बॉडीज को पुनर्जीवित करके भूजल स्तर में सुधार करना उद्देश्य
नगरनिगम आयुक्त एवं उपायुक्त टीएल सत्यप्रकाश ने बताया कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य गुड़गांव की लगातार सूखती और सिकुड़ती वाटर बॉडीज को पुनर्जीवित करके भूजल स्तर में सुधार करना है। इस परियोजना के लिए आम सहमति और स्थानीय हित-धारकों के बीच जागरूकता पैदा करने और उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने की रणनीति को अपनाया जा रहा है। परियोजना के तहत सूखती जा रही वॉटर बॉडीज की पहचान करने और उन्हें पुनर्जीवित करके पानी का प्रबंधन किया जाएगा।
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