गुड़गांव। दस साल पहले बने मिनी सचिवालय को आज तक फॉयर विभाग ने एनओसी नहीं दी है। आश्चर्य की बात यह है कि बिना फॉयर एनओसी के ही इमारत को जनता के लिए खोल दिया गया। सात मंजिला बनी इस इमारत में लगे अधिकतर फॉयर सिस्टम बेकार हो चुके हैं। इसकी हर मंजिल पर स्प्रिंकल्स नहीं लगाकर नेशनल बिल्डिंग कोड के नियमों की अनदेखी की गई है। इस मामले का खुलासा एसके शर्मा द्वारा मांगी गई आरटीआई से हुआ है।
केवल एक बार की गई जांच
आरटी आई में मांगी गई सूचना में बताया गया है कि मिनी सचिवालय में लगे अग्नि यंत्रों की जांच केवल एक बार की गई है। 7 मार्च 2013 को एक मॉक ड्रिल हुई थी, जिसमें मिनी सचिवालय में लगे अग्नि यंत्रों की जांच हुई। उसी दौरान यह भी सामने आया कि इस इमारत को फॉयर एनओसी ही नहीं मिली है। इसके बावजूद प्रशासन द्वारा इस ओर ध्यान ही नहीं दिया गया।
बदलते रहे जिम्मेदार विभाग
मिनी सचिवालय की बिल्डिंग का निर्माण हरियाणा अर्बन डेवलेपमेंट अथॉरिटी द्वारा किया गया था। बिल्डिंग तैयार होने के बाद इसका शुभारंभ कर कामकाज शुरू कर दिया गया। इसके साथ ही इसके रखरखाव की जिम्मेदारी पीडब्डल्यूडी को सौंप दी गई। पीडब्ल्यूडी द्वारा भी भारी अनियमितता का परिचय देते हुए इस मामले को उजागर नहीं किया गया। इतना ही नहीं मेंटनेंस के नाम पर आम जनता का जीवन भी खतरे में डाला। पीडब्ल्यूडी के बाद यह जिम्मेदारी अब जन स्वास्थ्य विभाग को दे दी गई है।
रोज सैकड़ों लोग आते हैं यहां
डिप्टी कमिश्नर, तीन डिप्टी पुलिस कमिश्नर, लेबर कमिश्नर, पब्लिक रिलेशन ऑफिसर, सचिव आरटीए, एसडीएम, रेवेन्यू डिपार्टमेंट, पुलिस हेडक्वार्टर शिक्षा विभाग के अलावा भी कई अन्य अधिकारी इसी इमारत में बैठते हैं लेकिन किसी ने सुध नहीं ली। जबकि इन विभागों में हर रोज सैकड़ों लोग अपने काम से आते हैं। इनके अलावा सैकड़ों सरकारी मुलाजिम भी यहां कार्यरत हैं। ऐसे में बिना एनओसी के चल रही इस इमारत में हर दिन खतरा बरकरार है।