गुड़गांव। विधानसभा चुनाव से पहले अवैध कॉलोनियों के नियमित होने का नगरवासियों का सपना अधूरा ही रह गया। नगर निगम द्वारा काफी जल्दबाजी किए जाने के बाद भी मामला सरकार के पास लटका रह गया। इन कॉलोनियों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव झेल रहे हजारों लोगों को चुनाव के बाद नई सरकार से गुहार लगानी पड़ सकती है। इसको लेकर लोगों में नाराजगी व्याप्त है। पहले तो इसमें नगर निगम स्तर पर ही भारी लापरवाही बरती गई। प्रदेश सरकार ने दिसंबर 2013 में ही घोषणा कर दी थी कि 31 दिसंबर 2013 तक विकसित सभी अवैध कॉलोनियां नियमित की जाएंगी। इसके लिए नगर निगम द्वारा प्रस्ताव भेजा जाए। मगर, प्रस्ताव तैयार करने में 8 महीना लगा दिए। इस संबंध में चौतरफा दबाव के बाद निगम ने बीते अगस्त में नगर निगम कमिश्नर और डिविजनल कमिश्नर से मंजूर करवाकर कुल 20 कॉलोनियों का प्रस्ताव प्रदेश सरकार के पास भेजा था।
निगम ने अगस्त में भेजा था 20 कॉलोनियों का प्रस्ताव: निगम ने 14 अगस्त को कुल 19 कॉलोनियों का प्रस्ताव स्थानीय शहरी निकाय विभाग के पास भेजा था। इनमें 11 नई कॉलोनियों के साथ 8 वे पुरानी कॉलोनियां भी शामिल थी, जिनमें कमियां निकाल कर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2013 में वापस कर दिया था। निगम द्वारा सारी कमियों को दूर कराते हुए इन कॉलोनियों के प्रस्तावों को दोबारा प्रदेश सरकार के पास भेजा गया था। कुछ ही दिन बाद निगम ने सूरत नगर फेज-2 का प्रस्ताव भी प्रदेश सरकार को भेज दिया था। इस तरह से इन 20 कॉलोनियों में रहने वाले हजारों लोगों ने राहत की सांस ली थी। लोगाें को पूरी आशा थी कि नगर निगम द्वारा भेजे गई सभी कॉलोनियों के प्रस्ताव मंजूर हो जाएंगे। चुनाव आचार संहिता लागू होने से पहले सरकार इसकी घोषणा कर देगी।
मगर, लोगों को मायूसी ही हाथ लगी। निगम द्वारा भेजे गए सभी प्रस्ताव स्थानीय शहरी निकाय विभाग के निदेशक के समक्ष लंबित पड़ी रह गई। स्थानीय लोगों के आग्रह पर निगम के अधिकारी प्रस्ताव को मंजूर कराने के लिए निदेशक से पैरवी करते रहे, मगर बात नहीं बनी। अब चुनाव की अधिसूचना जारी हो गई है। इस संबंध में कोई कार्रवाई आगे नहीं बढ़ाई जा सकती। ऐसे में सभी प्रस्ताव अधर में लटक गए हैं।
अब क्या होगा
प्रभावित लोगों को चुनाव के बाद अब नई सरकार से आशा करनी होगी। मगर, इसकी कोई गारंटी नहीं रहेगी कि नई सरकार इसी रूप में प्रस्ताव को मंजूर करेगी या फिर नए योजना के साथ फिर से प्रस्ताव भेजने के लिए कहेगी। तब तक लोगों को कॉलोनियों में मूलभूत समस्याओं का अभाव झेलना पड़ेगा। गुड़गांव में इसके अलावा भी पांच दर्जन से अधिक कॉलोनियां अवैध पड़ी हैं, जिसमें रहने वाले हजारों लोग बिजली, पानी, सीवर और सड़क की समस्या झेल रहे हैं। चुनाव में यह मुख्य मुद्दा हो सकता है।