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इस साहस को देश का सलाम, दूसरों को बचाते हुए दे दी अपनी जान

8 वर्ष पहले
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गुडग़ांव. छोटी सी उम्र में बहादुरों ने साहस का ऐसा परिचय दिया कि दुनिया भी अब इन्हें सलाम करती है। देश भर के चुने गए 25 नन्हें बहादुर बच्चे शनिवार को गुडग़ांव-दिल्ली बॉर्डर स्थित फन एंड फूड विलेज में मौज-मस्ती करने पहुंचे। इस दौरान दैनिक भास्कर ने कुछ बहादुर बच्चों के परिजनों से उनके हैरतअंगेज कारनामों की कहानी साझा की।
जान देकर निभाया दोस्ती का फर्ज
लखनऊ के टीकरी कलां गांव से ताल्लुक रखने वाली दस वर्षीय मौसमी भले ही इस दुनिया में नहीं रही लेकिन उसकी बहादुरी और जज्बे को आज पूरा देश सलाम करता है। मौसमी के पिता रामसूरत कश्यप ने बताया कि एक मई 2013 को मौसमी अपने दोस्तों केशकली और सोनिया के साथ गौमती नदी के किनारे पशु चराने गई, इस दौरान साथी केशकली के नदी में नहाते वक्त 20 फुट गड्ढे में डूबने लगी।
अपनी दोस्त को बचाने के लिए बिना सोचे समझे पानी में कूदते हुए उसे बचा लिया लेकिन वह खुद नहीं बच सकी। पिता कहते हैं कि बेटी भले ही दुनिया में नहीं रही लेकिन उसने जिस बहादुरी का परिचय देते हुए अपने दोस्त की जान बचाई उसकी खुशी मुझे जिंदगी भर रहेगी।
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