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चार्टर्ड अकाउंटेंट ने उठाया पुलिस कार्रवाई पर सवाल

6 वर्ष पहले
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गुड़गांव। फाजिलपुर में एलएलबी के छात्र मनीष द्वारा आत्महत्या का मामला अभी ठंडा नहीं हुआ है कि एक और मामले ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़ा कर दिया है। अब एक अकाउंटेंट ने भी पुलिस पर धारा 307 (हत्या का प्रयास) के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने निजी अस्पताल के चिकित्सकों के साथ मिलीभगत कर उसके खिलाफ जबरन इस धारा का प्रयोग किया है। पुलिस आयुक्त ने जांच निष्पक्षता से कराने का आश्वासन दिया है। जांच डीसीपी वेस्ट कुलविंद्र सिंह को सौंप दी गई है।

क्या है मामला
सीपी को दी गई शिकायत में सूर्य विहार निवासी रिजवान खान ने बताया कि वह एक निजी कंपनी में चार्टर्ड एकाउंटेंट हैं। उसके अनुसार 15 जनवरी को वे कंपनी से छुट्टी के बाद घर वापस लौट रहे थे, तभी इस बीच मोबाइल पर एक जरूरी फोन सुनने के लिए उसने अपनी गाड़ी साइड में लगा दी। वे गाड़ी में बैठकर ही बात करने लगे। उसके अनुसार इसी बीच पीछे से उसकी गाड़ी में एक डिजायर कार ने टक्कर मार दी।
जब उसने कार में सवार युवकों के समक्ष इसका विरोध किया, तो उन्होंने उल्टे उसे ही भला बुरा कहना शुरू कर दिया। उसने आरोप लगाया कि कार में सवार युवक शराब के नशे में चूर थे। उसके अनुसार इसी बीच उसके एक दोस्त का फोन आ गया, जिसे उसने घटना की जानकारी दे दी। इस पर उसका दोस्त भी मौके पर पहुंच गया। आरोप है कि कार में सवार युवक इस कदर नशे में चूर थे कि वे ठीक से चल भी नहीं पा रहे थे। इसमें से एक युवक ठोकर लगने के कारण गिर गया जिससे उसके मुंह में चोट लग गई।
रिजवान ने आरोप लगाया है कि नशे में धुत युवकों ने अपने खिलाफ कार्रवाई के भय से पुलिस में मारपीट की झूठी शिकायत दे दी। आरोप है कि युवकों की इस शिकायत के बाद पुलिस ने उनसे पैसे ऐंठने की योजना बनाई और एक अस्पताल के चिकित्सकों के साथ मिलकर पुलिस अधिकारियों ने उनके खिलाफ धारा 307 के तहत एफआईआर दर्ज कर ली।
उसने शिकायत में आरोप लगाया कि जिन युवकों की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई है वास्तव में उन्हें ऐसी कोई चोट नहीं है जिसके कारण उन्हें जीवन का खतरा हो। यह सब साजिश के तहत किया गया है। शिकायत में रिजवान ने डीजीपी के वर्ष 2010 के पत्र का भी हवाला दिया है। जिसमें कहा गया है कि बिना सरकारी डॉक्टर्स के पैनल की जांच के धारा 307 (कातिलाना हमला)के तहत एफआईआर दर्ज नहीं की जाए।