मगर, निगम कमिश्नर विकास गुप्ता के सामने नहीं आने पर प्रदर्शनकारियों ने डिविजनल कमिश्नर प्रदीप कासनी को ज्ञापन सौंपा। डिविजनल कमिश्नर ने मामले की जांच करने और मौके का दौरा करने तक तोड़-फोड़ की कार्रवाई नहीं करने का प्रदर्शनकारियों को भरोसा दिलाया। इसके साथ ही पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की आशंका टल गई।
आयुध डिपो के 900 मीटर प्रतिबंधित क्षेत्र के प्रभावित लोग सुबह 11 बजे नगर निगम कमिश्नर कार्यालय के सामने पहुंच गए। इनेलो के पूर्व नेता व पार्षद गजे सिंह कबलाना, गुड़गांव सिटीजन काउंसिल के अध्यक्ष आरएस राठी, कांग्रेसी नेता सूबे सिंह बोहरा संयुक्त रूप से मोर्चा ले रहे थे। प्रदर्शन में भारी संख्या में महिलाएं भी शामिल थीं। नेताओं ने इस प्रदर्शन के लिए चेतावनी दे रखी थी, इसलिए पुलिस भी पूरी तैयारी के साथ मौके पर डटी थी। भारी पुलिस बल के साथ कमांडो के जवान भी पूरी तैयारी के साथ तैनात थे।
पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को निगम कमिश्नर कार्यालय के सामने सड़क के दूसरी तरफ बैठने के लिए कहा। सभी एक किनारे बैठक गए और प्रदेश सरकार, निगम कमिश्नर और जिला प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। लोग पिछले दिनों की गई तोड़-फोड़ से आक्रोशित थे। इस कार्रवाई को कोर्ट के आदेश के खिलाफ और अमानवीय बता रहे थे।
ज्ञापन लिए बिना चले गए निगम कमिश्नर-
लगभग 11 बजे तक नगर निगम कमिश्नर विकास गुप्ता लघु सचिवालय से बैठक कर अपने ऑफिस आ गए। प्रदर्शनकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल निगम कमिश्नर से मिला और उनसे बाहर आकर लोगों को आश्वासन देने का प्रस्ताव रखा। मगर, कमिश्नर ने कार्यालय में ही ज्ञापन देने की बात की, जिसे नेताओं ने अस्वीकार कर दिया। प्रदर्शनकारी नेता निगम कमिश्नर के बाहर आकर ज्ञापन लेने की जिद पर अड़े थे।
नेताओं ने सिविल लाइन रोड को जाम करने की चेतावनी दी। फिर भी, निगम कमिश्नर ने अपना फैसला नहीं बदला। दोपहर लगभग एक बजे कमिश्नर कार्यालय से नीचे आए और कार में बैठकर चुप-चाप चले गए। कार्यालय के सामने बैठे प्रदर्शनकारियों को इसकी भनक तक नहीं लगी।
ज्वाइंट कमिश्नर की नहीं मानी बात-
लगभग आधे घंटे बाद निगम के ज्वाइंट कमिश्नर नरेंद्र यादव और वाईएस गुप्ता कार्यालय से बाहर आए और नारेबाजी कर रहे नेताओं को बुलाया। नरेंद्र यादव ने कबलाना, आरएसराठी सूबे सिंह को बताया कि निगम कमिश्नर कार्यालय में नहीं हैं। ज्ञापन उन्हें ही सौंप दें, मगर नेता नहीं माने। नेताओं ने कहा कि वे डिविजनल कमिश्नर को जाकर ज्ञापन सौंपेंगे। नरेंद्र ने हर तरह से मनाने की कोशिश की, मगर प्रदर्शनकारी नहीं माने।
नेता मोर्चे पर वापस लौट गए और जुलूस लेकर लगभग 500 मीटर दूरी पर स्थित डिविजनल कमिश्नर कार्यालय की ओर जाने लगे। मगर, पुलिस ने किसी को आगे नहीं बढ़ने दिया। पुलिस जवानों ने लोगों को चारों तरफ से घेर रखा था। प्रदर्शनकारी कुछ आगे बढ़े और बीच सड़क पर खड़े हो गए। पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए सभी को बीच सड़क पर बैठा दिया।
इसी दौरान पुलिस टीम का नेतृत्व कर रही डीसीपी संगीता कालिया ने चेतावनी दी कि जुलूस को किसी भी शर्त पर डिविजनल कमिश्नर कार्यालय तक नहीं जाने दिया जाएगा। उन्होंने प्रदर्शनकारियों के नेताओं को बुलाया और समझाने की पूरी कोशिश की। डीसीपी ने स्पष्ट कर दिया कि डिविजनल कमिश्नर को ज्ञापन सौंपने के लिए केवल 11 व्यक्तियों का प्रतिनिधिमंडल ही कार्यालय जाएगा। वहां पर कोई नारेबाजी नहीं करेगा। डिविजनल कमिश्नर को बाहर आने की जिद भी कोई नहीं करेगा। इसके लिए उन्होंने पुलिस अधिकारियों की जिम्मेवारी सौंपी। पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए जुलूस को आगे बढ़ने से रोक दिया।
डिविजनल कमिश्नर के आश्वासन पर खुशी-खुशी लौटे-
डीसीपी की हिदायतों के अनुसार प्रदर्शनकारियों का प्रतिनिधिमंडल डिविजनल कमिश्नर प्रदीप कासनी से मिला। नेताओं ने निगम कमिश्नर के रुखे रवैये की शिकायत की। लोगों ने कासनी को बताया कि दस्ते ने 3 दिसंबर को बिना नोटिस दिए आयुध डिपो की चारदीवारी तोड़कर जेसीबी से पुराने मकानों को ध्वस्त कर दिया। जबकि हाई कोर्ट का आदेश नए निर्माण नहीं होने देने का है। नेताओं ने बताया कि जनवरी में हाई कोर्ट ने प्रतिबंधित क्षेत्रों में सीवर, बिजली व पानी आदि मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने का आदेश दिया था, मगर इस पर आज तक अमल नहीं हुआ।
सभी की बातों को ध्यानपूर्वक सुनने और ज्ञापन के साथ कोर्ट के आदेशों की प्रति लेने के बाद डिविजन कमिश्नर ने कुछ समय देने की बात की, जिस पर सभी राजी हो गए। इसके साथ ही डिविजनल कमिश्नर ने मौके का निरीक्षण करने तक तोड़-फोड़ नहीं होने देने का लोगों को भरोसा दिलाया। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि कानून का हर हाल में पालन होगा। मामला कोर्ट में चल रहा है। कोर्ट में सभी को अपना पक्ष रखने का अधिकार है। डिविजनल कमिश्नर के सकारात्मक जवाब से किसी तरह टकराव की स्थिति टल गई।
आगे की स्लाइड में देखिए तस्वीरें...