गुडग़ांव. नगर निगम कमिश्नर डा. प्रवीण कुमार ने विकास कार्यों व गुणवत्ता में लापरवाही के लिए निगम के इंजीनियरों को जमकर फटकार लगाई है। सोमवार को स्थानीय लघु सचिवालय के सभागार में इंजीनियरों के साथ बैठक में उन्होंने हिदायत दी कि अनुशासनहीनता और कार्य में लापरवाही किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अगर कोई अधिकारी ऐसा करता पाया गया तो, उसके खिलाफ सख्त विभागीय कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने एसडीओ और जेई को क्षेत्र का पूरा ब्यौरा रखने और अपने-अपने क्षेत्र में हो रहे कार्यों की 10 दिन में मास्टर फाइल तैयार करने के निर्देश दिए।
कमिश्नर ने इंजीनियरों से कहा कि आप यह ना सोचें कि आप सरकारी नौकरी में आ गए हैं, इसलिए आपके खिलाफ कार्यवाही नहीं हो सकती। अगर आपकी ऐसी सोच है तो, उसे अपने मन से निकाल दें और काम पर ध्यान दें। उन्होंने कहा कि वे पिछले काफी दिनों से नगर निगम क्षेत्र का दौरा कर रहे हैं और निरीक्षण के दौरान उन्हें कई कमियां देखने को मिली हैं।
भविष्य में ऐसी कोताही नहीं होनी चाहिए। कमिश्नर ने इंजीनियरों से कहा कि वे काम को प्राथमिकता दें और मौके पर जाकर निरीक्षण रिपोर्ट तैयार करके उनके पास भेजें। इसके बाद वे स्वयं मौके का निरीक्षण करेंगे और काम में कमी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय शेष पेज-15
कार्यवाही करने से भी गुरेज नहीं करेंगे। कमिश्नर ने कहा कि एसडीओ और जेई को यह पता होना चाहिए कि उनके कार्य क्षेत्र की समस्याएं क्या है, कौन-कौन से विकास कार्य चल रहे हैं और उनकी प्रगति की स्थिति क्या है, कौन ठेकेदार काम करवा रहा है और कहां पर अनधिकृत रूप से निर्माण हो रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मास्टर फाइल में इस बात का भी जिक्र होना चाहिए कि विकास कार्य कब शुरू हुआ और कब तक पूरा हो जाएगा। अगर कार्य की गति धीमी है तो उसका कारण भी मास्टर फाइल में लिखा होना चाहिए।
सैंपल भरने की प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराने का निर्देश
उन्होंने विकास कार्यों में प्रयोग की जाने वाली निर्माण सामग्री के सैंपल भरने तथा उसकी गुणवत्ता को चेक करने के निर्देश भी दिए। साथ ही कहा कि सैंपल भरते समय इस प्रक्रिया की पूरी वीडियोग्राफी करवाई जानी चाहिए और लिखित रिकार्ड के साथ-साथ डिजिटल रिकार्ड भी तैयार करें।
जलसंरक्षण के उपाय सुझाए
डा. प्रवीण ने जल संरक्षण के उपायों की जानकारी देते हुए कहा कि आज पानी की किल्लत गंभीर रूप धारण करती जा रही है और आने वाले समय में यह समस्या और विकट ना हो, इसके लिए हमें अभी से उपाय करने होंगे। उन्होंने कहा कि इसके लिए पौधारोपण करवाएं तथा उनकी सुरक्षा के भी उपाय करें।
इसके अलावा वाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली के लिए अपने-अपने क्षेत्रों में जगहों की पहचान करें। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि अगर हम बरसाती पानी का 5वां हिस्सा भी हारवैस्ट कर पाते हैं, तो यह काफी अच्छा कदम होगा। उन्होंने एक प्रेजेंटेशन के माध्यम से जल संरक्षण के बारे में विस्तृत जानकारी इंजीनियरों को दी।
बैठक में नगर निगम के चीफ इंजीनियर बीएस सिंगरोहा, कार्यकारी अभियंता एनडी वशिष्ठ, एसके यादव, सीआर बिश्नोई, प्रदीप कुमार सहित इंजीनियरिंग विंग के एसडीओ तथा जेई उपस्थित थे।