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साइबर सिटी में लोगों को जोड़ने के लिए ‘नेताजी’ मंगा रहे हैं मिस्ड कॉल

7 वर्ष पहले
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गुड़गांव। साइबर सिटी में विधानसभा चुनाव की सरगर्मी परवान चढ़ने लगी है। धरातल से लेकर सोशल मीडिया तक एक दूसरे को पछाड़ने की कवायद शुरू कर दी गई है। युवा हो या अन्य उम्र वर्ग के लोग अपनी बात पहुंचाने के लिए जमकर फेसबुक व ट्वीटर का इस्तेमाल हो रहा है।
मंगाया जा रहा है मिस्ड कॉल: नेताजी लोगों को जोड़ने के लिए मिस्ड कॉल मंगा रहे हैं।
इसके लिए विभिन्न पार्टियों ने दस नंबर का मोबाइल नंबर भी जारी किया है। फेसबुक व ट्वीटर का एड्रेस भी दिया जा रहा है। ताकि अासानी से जनता उनसे जुड़ सके। बड़ी संख्या में यहां के युवा विभिन्न मल्टीनेशनल कंपनियों में काम करते हैं। वहां तक अपनी बात पहुंचाने के लिए जमकर सोशल मीडिया का उपयोग किया जा रहा है। इसके लिए प्रोफेशनल्स की टीम भी लगाई गई है।
लोगों को जोड़ने के साथ फेसबुक पर जन अदालत भी लगाई जा रही है। अपनी ताकत का प्रदर्शन भी किया जा रहा है। लोगों से सुझाव मांगा जा रहा है। ताकि चुनाव के दौरान मांगों को उठाया जा सके। क्षेत्र भ्रमण के दौरान उमड़ रही लोगों की भीड़ अपने आकाओं तक पहुंचाने के लिए उनके फेसबुक अकाउंट से टैग भी कर दिया जाता है। जिससे बड़े नेताओं के सामने हाजिरी लग सके। बड़े नेताओं के सामने अपनी बात पहुंचाने के लिए न्यू मीडिया का सहारा लिया जा रहा है।

लाइक व कमेंट की लेते हैं जानकारी: सोशल मीडिया पर सक्रियता के साथ आईटी सेक्टर देख रहे प्रोफेशनल्स से नेताजी लाइक व कमेंट की जानकारी लेना नहीं भूलते हैं। लाइक देख जहां आंखें चमक जाती हैं। वहीं कमेंट से सतर्कता बढ़ती है। प्रोफेशनल्स की टीम नेताओं के प्रोफाइल को मैनेज करते हैं। अभी प्रमुख पार्टियों ने बादशाहपुर, गुड़गांव व पटौदी में उम्मीदवार उतारे हैं। इनकी सक्रियता क्षेत्र व फेसबुक में बढ़ गई है।

व्हाट्स अप भी बना जरिया: कार्यकर्ताओं से ऐसे फोन लेने की गुजारिश की जा रही है। जिससे में फेसबुक, ट्वीटर व व्हाट्स अप काम कर सके। मैसेज एक दूसरे के पास पहुंचाने के लिए व्हाट्स अप का जमकर सहारा लिया जा रहा है। कार्यकर्ता, पदाधिकारियों व नेताओं के बीच यह सबसे अधिक हॉट बना हुआ। एक राजनीतिक जानकारी मिलते ही इसे क्षण भर में सभी जगह भेज दिया जाता है।
इनका कहना है
बदलते जमाने के साथ कदमताल करना जरूरी है। न्यू मीडिया के अप्रोच को देखते हुए चुनाव प्रचार का ट्रेंड बदला है। लोकसभा चुनाव के दौरान फेसबुक, ट्वीटर व व्हाट्स अप जैसे सोशल मीडिया के प्रभाव से सभी परिचित है। इसे देखते हुए ही नेताओं की सक्रियता अधिक बढ़ गई है।
- गौरव कश्यप, सॉफ्टवेयर इंजीनियर