संयुक्त पुलिस कमिश्नर विवेक शर्मा ने बताया कि रिमांड के दौरान आरोपियों की निशानदेही से कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। आरोपी यूपी के बिजनौर निवासी रवि व मथुरा के बृजकिशोर ने बताया कि उन्होंने बैंकों का डाटा दिल्ली के शाहदरा निवासी 26 वर्षीय आशीष गुप्ता से 25 हजार में खरीदा था। वे पहले इंश्योरेंस एजेंट का काम कर चुके हैं। इसीलिए इन्हें उपभोक्ताओं को अटैंड करने की समझ थी। इस पर पुलिस ने आशीष गुप्ता को उसके घर से ही शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया। आशीष एमसीए है। उसके लैपटॉप से भारत सहित दुनियाभर के 70 करोड़ लोगों का डाटा मिला है। इस डाटा को बेचकर उसने 10 लाख रुपए कमाए हैं।
शिकायत के बाद पुलिस ने की कार्रवाई
सेक्टर-14 निवासी लोकेन्द्र पाल सिंह ने सिविल लाइन थाने में शिकायत दी थी कि एक व्यक्ति ने उनको फोन कर अपने को आईसीआईसीआई बैंक में इंश्योरेंस कर्मचारी बताया। उसके बाद फोनकर्ता ने लोकेंद्र की इंश्योरेंस पालिसी का पूरा विवरण देकर विश्वास में ले लिया। फिर पालिसी पर मिलने वाले ब्याज व क्लेम का विवाद सुलझाने का झांसा देते हुए रकम वापस कराने की बात कही। इसके लिए उसने लोकेंद्र से उसके एटीएम कार्ड की पूरी डिटेल मांगी। लोकेंद्र ने भी विश्वास करके जानकारी दे दी। बाद में पता चला कि उसके खाते से एक लाख रुपए निकल गए।
कैसे हुआ खुलासा
इस मामले की जांच साइबर सेल प्रभारी इंस्पेक्टर सुधीर कुमार को सौंपी गई। जांच में पता चला कि जिस व्यक्ति ने आईसीआईसीआई बैंक का इंश्योरेंस कर्मचारी बताकर बात की थी उसने लोकेंद्र से उसके एटीएम कार्ड का विवरण लिया था। उसके बाद खुद की बनाई हुई न्यू इलेक्ट्रानिक्स वेबसाइट से सामान खरीदने के बहाने लोकेंद्र के खाते की रकम को इसी वेबसाइट के खाते में डाल देते थे।
इसके लिए वन टाइम पासवर्ड (ओटीपी) की भी जानकारी लोकेंद्र से ली गई। उसके बाद फर्जी आईडी पर लिए गए सिम का प्रयोग कर
मोबाइल साफ्टवेयर वाई-पे कैश का इस्तेमाल करके लोकेंद्र के खाते से न्यू इलेक्ट्रॉनिक्स वेबसाइट के खाते में एक लाख रुपए ट्रांसफर कर लिए। इस वाई-पे कैश एप्लिकेशन से जैसे ही लोकेंद्र के खाते को अटैच किया गया तो साइबर क्राइम सेल ने आईपी एड्रेस की सहायता से तुरंत ही पे-यू गेटवे कंपनी से संपर्क कर रकम को ट्रांसफर करने से रुकवा दिया।
इसके अलावा फर्जी वेबसाइट के पेमेंट गेटवे न्यू इलेक्ट्रानिक्स को ब्लाक कराया गया। उसके बाद विशेष जांच करके दो व्यक्तियों को दिल्ली के न्यू अशोक नगर से गिरफ्तार कर लिया गया। जिनकी पहचान उत्तर प्रदेश के बिजनौर निवासी 25 वर्षीय रवि और मथुरा निवासी 25 वर्षीय बृजकिशोर के रूप में हुई।
बरामदगी भी चौंकाने वाली
संयुक्त पुलिस कमिश्नर विवेक शर्मा ने बताया कि रिमांड पर पूछताछ के दौरान आरोपियों की निशान देही से कई चौकाने वाले रहस्य सामने आए हैं। आरोपियों ने बताया कि वे पहले इंश्योरेंस एजेंट का काम कर चुके हैं। इसीलिए इन्हें उपभोक्ताओं को अटैंड करने की समझ थी।
बरामद किया गया सामान
पुलिस ने आरोपियों से 33 मोबाइल सिम,10 मोबाइल फोन, 2 डाटा कार्ड,1पेन ड्राइव,1लैपटाप,10 एटीएम कार्ड, 1कार्ड रीडर, 4 फर्जी पैन कार्ड, 10 फर्जी आईडी कार्ड, 2 मेट्रो कार्ड, 1टाटा इंडिगो कार, 2 मोटरसाइकिल बरामद की है। लेकिन सबसे अधिक चौंकाने वाली बात यह थी कि इनसे बरामद हुए पैन ड्राइव व लैपटाप में रिलांयस इंश्योरेंस कंपनी के 40 हजार, आईसीआईसीआई प्रोडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस के 45 हजार, पीएनबी मेटलाइफ के 12 हजार, एसडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस के 20 हजार, बिरला सन लाइफ के एक लाख ग्राहकों का डाटा मौजूद था। इसमें विशेष तौर पर दिल्ली-एनसीआर, गुजरात, मध्यप्रदेश के उपभोक्ताओं का डाटा है। इसी डाटा के आधार पर ग्राहकों को झांसा देकर धोखाधड़ी की जाती थी।
(फोटो- पुलिस गिरफ्त में ऑनलाइन फ्रॉड करने के आरोपी।)