गुड़गांव। छात्र मनीष के आत्महत्या मामले में दोषी पुलिस वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर परिजनों और ग्रामीणों ने पुलिस कमिश्नर कार्यालय पर प्रदर्शन किया। ग्रामीणों द्वारा मृतक मनीष के दूसरे भाई के खिलाफ दर्ज झूठे मुकदमे की निष्पक्ष जांच कराने और लगाई गई धाराओं को हटाने की मांग की। इस पर पुलिस कमिश्नर नवदीप सिंह ने जांच के लिए गठित एसआईटी टीम के एसीपी मानेसर को हटाकर उद्योग विहार एसीपी को लगाया है। उन्होंने टीम को जल्द जांच कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए।
पुलिस से परेशान होकर की थी आत्महत्या
मृतक मनीष के चाचा ईश्वर सिंह ने चार पुलिस कर्मियों के खिलाफ आरोप लगाया था कि हवलदार राजेश व कोमल तथा जांच अधिकारी एएसआई नरेंद्र सिंह शुक्रवार को मनीष के घर आए थे। तीनों ने तीन लाख की डिमांड कर मनीष को पेश करने को कहा था। रकम नहीं देने पर परेशान करने की धमकी दी थी। इन पुलिस कर्मियों से पहले एसीपी सदर का एक रीडर भी पांच लाख की रकम मामले को हल्का करने के लिए मांग रहा था। इससे मनीष तनाव में आ गया और उसने कमरा बंद कर फांसी लगा ली।
गठित की गई थी एसआईटी
चार पुलिस कर्मियों पर आरोप लगाने के बाद एफआईआर दर्ज की गई थी। आरोपों की जांच के लिए पुलिस कमिश्नर नवदीप सिंह ने डीसीपी ईस्ट के नेतृत्व में एक एसआईटी गठित थी। इसमें मानेसर एसीपी, सदर एसएचओ समेत चार अन्य पुलिस कर्मी शामिल थे। एसआईटी की जांच से मृतक मनीष के परिजन संतुष्ट नहीं थे। उनको जांच टीम पर भरोसा नहीं था।
एसआईटी से मानेसर एसीपी को हटाया
एसीपी क्राइम राजेश कुमार ने बताया कि पुलिस कमिश्नर नवदीप सिंह विर्क द्वारा मृतक मनीष के परिजनों की मांग पर जांच को निष्पक्ष कराने का भरोसा दिलाया है। जांच के लिए गठित एसआईटी में मानेसर एसीपी को हटा दिया गया है। उनकी जगह उद्योग विहार एसीपी को लगाया गया है।
निष्पक्ष जांच कराने की मांग
मृतक मनीष के परिजनों और ग्रामीणों ने जांच को निष्पक्ष कराने की मांग को लेकर सीपी कार्यालय पर प्रदर्शन किया। उन्होंने सीपी से गुहार लगाई कि मृतक के भाई पर लगाई गई धाराएं हटाई जाएं और जांच टीम के एसीपी को हटाया जाए। ग्रामीण कमल कुमार ने कहा कि आरोपी चारों पुलिस कर्मियों को एसआईटी बचाने की कोशिश कर रही है। मानेसर एसीपी को हटाया जाएगा।
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