(फोटो- द्रोणाचार्य कॉलेज में सीढ़ियों पर बैठकर पढ़ाई करते छात्र।)
गुड़गांव। प्रदेश सरकार बेशक प्रदेश को हर क्षेत्र में नंबर वन बताती है, लेकिन गुड़गांव अब भी कई क्षेत्रों में पिछड़ा है। शिक्षा के क्षेत्र में आलम ये है कि द्रोणाचार्य कॉलेज में सीढ़ियों व खुले आसमान के नीचे कक्षाएं लग रही हैं। फिलहाल गुड़गांव में आठ गवर्नमेंट कॉलेज हैं। लेकिन तीन कॉलेज ऐसे हैं, जहां ग्रामीण क्षेत्रों से भारी संख्या में छात्र शिक्षा ग्रहण करने आते हैं।
छात्रों की संख्या सबसे अधिक द्रोणाचार्य गवर्नमेंट कॉलेज में है। इस कॉलेज में 3500 छात्रों के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध है, लेकिन यहां 7400 छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। कॉलेज में छात्र-छात्राओं के बैठने के लिए भी पर्याप्त जगह मौजूद नहीं है। छात्र-छात्राओं की अधिक संख्या होने के कारण कई कक्षाएं सीढ़ियों व खुले आसमान के नीचे लगती हैं।
गुरु द्रोणाचार्य के नाम पर बने द्रोणाचार्य गवर्नमेंट कॉलेज की शुरुआत 1951 में हुई थी। इसके बाद से लगातार कॉलेज का विस्तार होता रहा है, लेकिन अब इस कॉलेज में छात्रों की संख्या के अनुसार छात्र-छात्राओं के बैठने तक भी स्थान नहीं है।
कॉलेज में लेक्चरर की भी भारी कमी है। हालांकि लेक्चरर की कमी शहर के तीनों कॉलेजों में है, लेकिन सभी कॉलेजों में गेस्ट टीचर व एक्सटेंशन टीचर के सहारे पढ़ाई कराई जा रही है। पांच अगस्त को भी द्रोणाचार्य गवर्नमेंट कॉलेज में एक्सटेंशन टीचरों की भर्ती की गई थी, जिसमें भारी संख्या में एक्सटेंशन टीचर रखे गए थे।
बैठने के लिए भी नहीं पर्याप्त स्थान
कॉलेज में कमरों की भारी कमी है। इस कॉलेज में 7400 छात्रों की करीब 125 कक्षाएं लगती हैं। यहां तक कि अकेले बीए फर्स्ट ईयर के 11 सेक्शन बनाए गए हैं। इसी प्रकार सभी संकायों के अलग-अलग सेक्शन हैं। कॉलेज में केवल 50 कमरे हैं, जिनमें 50 कक्षाएं ही लग सकती हैं। ऐसे में आधे से अधिक कक्षाएं या तो खुले आसमान में लगती हैं।
लैब में नहीं हैं पर्याप्त सामान
कॉलेज में खासकर साइंस स्टूडेंट्स के लिए लैब में पर्याप्त सामान नहीं है। इससे छात्र-छात्राओं को अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। इसके अलावा कई छात्र तो प्रैक्टिकल ज्ञान से ही वंचित रह जाते हैं।
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(गुड़गांव. द्रोणाचार्य कॉलेज परिसर।)
क्या कहते हैं प्रिंसिपल
डीएसडी कॉलेज प्रिंसिपल आरके यादव भी मानते हैं कि कॉलेज में संसाधनों की कमी है। इस संबंध में वे कई बार हायर एजुकेशन के उच्चाधिकारियों को पत्र लिख चुके हैं। हर बार सरकार द्वारा सीटें बढ़ाने की घोषणा कर दी जाती है, लेकिन संसाधन नहीं बढ़ाए जाते, जिससे यह परेशानी खड़ी हो गई है। हालांकि 12 कमरों के लिए अनुमति उच्चाधिकारियों से मिली है, जल्द ही इन कमरों का निर्माण करवाया जाएगा।