फिरोजपुर झिरका. करोड़ों रुपए की लागत से बनने वाला खेल स्टेडियम 6 वर्ष बाद ही जर्जर हो गया है। इससे इलाके के खेल प्रेमी प्रदेश सरकार की खेलों को बढ़ावा देने की नीति पर सवाल उठा रहे हैं।
खेल प्रेमी व इलाके के लोगों का कहना है कि सरकार मेवात के साथ भेदभाव कर रही है। एक तरफ तो सरकार खेलों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिवर्ष करोड़ों रुपए खर्च कर रही है। जगह-जगह स्टेडियम बनाकर खिलाड़ियों को तैयार किया जा रहा है। वहीं फिरोजपुर झिरका में 1 करोड़ 66 लाख रुपए की लागत से बनने वाला आधुनिक स्टेडियम ठेकेदार की लेटलतीफी के कारण 6 वर्ष बीत जाने के बाद भी अधूरा पड़ा है।
खेल प्रेमी राकेश जैन, अशोक
सोनी, मनोज गोयल, मोहन गोयल, इंद्रजीत
सोनी, विष्णु सोनी, रोहित ने बताया कि प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने 17 जनवरी 2008 को इस स्टेडियम का शिलान्यास किया था। उन्होंने इलाके के लोगों से वादा किया कि एक वर्ष में यह आधुनिक सुविधाओं से लैस स्टेडियम लोगों को सौंप दिया जाएगा। परंतु 6 वर्ष बीत जाने के बाद भी स्टेडियम में बिल्डिंग के नाम पर केवल इंडोर का निर्माण व बैठने के लिए दो रैम्प बनाए गए हैं। दो मैदान की पिच बनाई गई है। जबकि हालत यह है कि इस स्टेडियम को अभी तक समतल भी नहीं किया गया है। सारा मैदान उबड़-खाबड़ है। ठेकेदार द्वारा बनाए गए भवन के गेट, जंगला, चौखटों को शरारती तत्वों ने तोड़ दिया है। यही नहीं भवन दिन में जुआरियों का अड्डा व शाम ढलते ही मयखाने में बदल जाता है। इंडोर में बने शौचालयों को पूरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया गया है। स्थानीय लोगों ने कहा कि अगर प्रदेश सरकार इलाके के खिलाड़ियों को मौका दे, तो वह दिन दूर नहीं जब ओलंपिक में यहां के खिलाड़ी पदक हासिल कर देश का नाम रोशन करेंगे।
क्या कहते हैं एसडीओ
इस बारे में एसडीओ लोक निर्माण विभाग सत्येंद्र सिंह का कहना है कि जितना रुपया सरकार ने दिया है, उतना खर्च कर दिया है। स्टेडियम लगभग 3 वर्ष पूर्व बनकर तैयार है, जिसके बारे में स्पोर्ट्स विभाग को लिखकर भेजा जा चुका है। लेकिन कोई भी विभाग इसे अपने कब्जे में नहीं ले रहा है।
फोटो- शरारती तत्वों द्वारा क्षतिग्रस्त किया गया खेल स्टेडियम का प्रवेश द्वार।