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डाउनलोड करेंगुडग़ांव। प्रदेश के अधिकारियों का गुडग़ांव नगर निगम से मोह कम नहीं हो रहा है। अभी मंगलवार को ही नगर निगम कमिश्नर डॉ. प्रवीण कुमार ने सरकार के आदेश पर मेडिकल आफिसर (एमओ) डॉ. सुमित धनखड़ को रिलीव किया था, लेकिन अब डॉ. धनखड़ ने अपना तबादला वापस करवा लिया।
अब सरकार के आदेश पर धनखड़ को नगर निगम में दोबारा नियुक्त करना कमिश्नर की मजबूरी हो गई है। डॉ. धनखड़ नगर निगम में एमओ के पद पर 21 फरवरी 2013 को नियुक्त हुए थे। वह यहां पर सफाई का काम देखते थे। प्रदेश सरकार ने बीते 6 जनवरी को डॉ. धनखड़ को गुडग़ांव नगर निगम से माधोगढ़ (महेंद्रगढ़) में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में मेडिकल आफिसर के पद लगाने का आदेश जारी किया था। माधोगढ़ में मेडिकल आफिसर का पद खाली पड़ा है। वहां पर आफिसर नहीं होने के चलते स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं, मगर डॉ. धनखड़ माधोगढ़ नहीं गए।
वह गुडग़ांव में ही निगम के पद पर डटे रहे। निगम कमिश्नर ने 21 जनवरी को धनखड़ को रिलीव कर दिया, फिर भी वह माधोगढ़ नहीं गए। इस बीच वह अपना तबादला रद्द कराने के लिए राजनीतिक जोर लगाते रहे। आखिरकार, डॉ. धनखड़ जीत गए। वह सरकार से अपना तबादला वापस कराने में सफल हो गए। उन्होंने गुरुवार को नगर निगम कमिश्नर को अपने वापसी का सरकार का आदेश थमा दिया। अब निगम कमिश्नर के लिए मजबूरी हो गई। मजबूरी में उन्होंने डॉ. धनखड़ को निगम में ज्वाइन कराया।
विडंबना है कि डॉ. धनखड़ को नगर निगम की तरफ से वेतन नहीं मिल रहा है। वह एक साल से बिना वेतन के ही काम कर रहे हैं। 21 फरवरी 2013 को नियुक्त होने के साथ ही आडिट ब्रांच ने आपत्ति जताई थी कि वे निगम में एमओ के पद के लिए योग्य नहीं हैं, इसके बावजूद उन्हें इस पद पर तैनात करना नगर निगम इंप्लाइज सर्विस रूल 1998 के खिलाफ है। उनकी नियुक्ति के लिए सरकार द्वारा रूल में बदलाव करने की आवश्यकता होगी। इस आधार पर आडिट ब्रांच ने उनके वेतन पर रोक लगा दी थी। गौर करने वाली बात है कि वेतन नहीं मिलने के बाद भी वह निगम को छोडऩे के लिए तैयार नहीं हैं।
॥सरकार से डॉ. धनखड़ की वापसी के आदेश की प्रति मिल गई है। सरकार के आदेश पर उनसे निगम में काम लिया जाएगा। अच्छा काम करने के लिए उन्हें अच्छी ट्रेनिंग दी जाएगी।
डॉ. प्रवीण कुमार, कमिश्नर नगर निगम गुडग़ांव
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