गुड़गांव। लेट नाइट एमएनसी में काम करने वाली महिला कर्मचारियों के लिए देर रात सुरक्षित घर पहुंचना प्राथमिकता बन गई है। ऐसी बहुत सी महिलाएं घर जाने के लिए टैक्सी व कैब का इस्तेमाल करती हैं, लेकिन दिल्ली कैब रेप की घटना ने कैब व टैक्सी चालकों को संदेह के घेरे में डाल दिया है।
गुड़गांव पुलिस एमएनसी में देर रात तक काम करने वाली महिलाओं को एक सहूलियत दे सकती है, जिससे महिलाएं केवल 1 रुपए खर्च कर अपने को सुरक्षित महसूस करेंगी। दरअसल, महिलाओं को कैब/टैक्सी चालकों की सही जानकारी के लिए एसएमएस करना होगा, इसमें 1 रुपए खर्च होगा। कैब चालकों की एसएमएस वेरीफिकेशन सर्विस महिलाओं लिए सबसे अधिक कारगर साबित हो सकती है। कैब की सर्विस लेकर उसमें सफर करने से पहले एक एसएमएस कर उसकी सत्यता जांची जा सकती है। सहायक पुलिस कमिश्नर के अनुसार इसके लिए आईटी एक्सपर्ट से सलाह ली जा रही है। टैक्सी व कैब चालकों का वेरीफिकेशन में जमा किए गए डाटा का इस्तेमाल इस सर्विस के उपयोग में लाया जा सकता है। गुड़गांव पुलिस के लिए इस सर्विस की सुविधा देना कोई बड़ी बात नहीं है। क्योंकि इसी तर्ज पर ऑटो सवारियों द्वारा एसएमएस कर ऑटो चालकों का वेरीफिकेशन और उनके बारे में जानकारी पता करने की सर्विस पहले से दी ही जा रही है। इसी आधार पर टैक्सी व कैब चालकों की जानकारी भी ली जा सकती है।
रास आ रहा एसएमएस वेरिफिकेशन: पुलिस द्वारा ऑटो वेरिफिकेशन सुविधा का लाभ महिलाओं को रास आ रहा है। जिले में चल रहे 20 हजार से अधिक से ऑटो में रोजाना करीब 12 लाख से अधिक लोग सफर करते हैं। पुलिस द्वारा शुरू की गई इस सुविधा से ये लाखों लोग सुरक्षित यात्रा कर रह रहे हैं। इन्हें केवल ऑटो में बैठने से पहले 8860622032 पर ऑटो का पूरा नंबर एसएमएस करना होता है। एसएमएस करते ही
मोबाइल पर वीएम-पीओएलजीजीएन से मैसेज आता है। इस मैसेज में ऑटो ड्राइवर का नाम आएगा। जिसका मतलब यही है कि इस ऑटो की पूरी जानकारी गुड़गांव पुलिस के पास उपलब्ध है।
सुरक्षा के साथ फायदा भी
महिलाओं को अपनी यात्रा के दौरान भी सुरक्षा की चिंता होना लाजिमी है, इसी परेशानी को दूर करने के लिए पुलिस ने ऑटो वेरिफिकेशन सुविधा की शुरूआत की है। दूसरा लाभ यह भी है कि अगर किसी का भी सामान ऑटो में छूट जाए तो इस सुविधा की सहायता से उसका सामान मिलने में आसानी रहती है। अगर ऑटो का रजिस्टर्ड नंबर एसएमएस करने के बाद जवाब में ऑटो ड्राइवर का नाम नहीं आता है तो ऐसे ऑटो में यात्रा करने का सुझाव पुलिस नहीं देती है।
'ऐसा संभव हो सकता है। इसके लिए पुलिस के आईटी एक्सपर्ट से तुरंत सलाह ली जाएगी। अगर कोई बड़ी समस्या खड़ी नहीं होती है तो इस पर काम शुरू करवा दिया जाएगा। वैसे भी पुलिस कमिश्नर द्वारा सभी एसएचओ को कैब व टैक्सी चालकों और टैक्सी स्टैंड मालिकों का वेरीफिकेशन करने के लिए 1 महीना का समय दिया गया है। इसी डाटा का इस्तेमाल इसके लिए किया जा सकता है।' राजेश कुमार, एसीपी, क्राइम गुड़गांव