गुड़गांव। फेसबुक का वोटरों के बीच जिस तरह क्रेज बढ़ा है, उसे देख सियासी पार्टियों व प्रत्याशियों के बीच भी बेचैनी बढ़ी है। अब पार्टियों में सोशल मीडिया के जरिए ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंच बनाने की होड़ शुरू हो गई है। यहां तक कि कई प्रत्याशियों ने चुनाव प्रचार के लिए सोशल मीडिया को हैंडल करने के लिए अलग टीम ही बना दी है। टीम प्रत्याशी के हर रोज के कार्यक्रम को अपडेट तो करती ही है, साथ ही लोगाें तक अासानी से अपनी बात भी पहुंचाती है। सोशल मीडिया से प्रत्याशी को वोटरों की नब्ज टटोलने में भी मदद मिलती है।
विधान सभा चुनाव के एलान के साथ ही गुड़गांव के प्रत्याशियों के बीच फेसबुक पर वाक युद्ध छिड़ गया है। हर प्रत्याशी ने फेसबुक पर कम से कम अपने दो प्रोफाइल बनाए हैं, जिसमें एक प्रोफाइल पेज है। हालांकि, प्रत्याशियों के पेज को मिले लाइक्स और फ्रेंड्स की संख्या से जनाधार का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। ऐसा बीते लोकसभा चुनाव में भी देखा गया था। लोकसभा चुनाव में जिस उम्मीदवार को सबसे अधिक लाइक्स मिली थी, वे अपनी जमानत भी नहीं बचा पाए थे। चुनावी मौसम में फेसबुक की अहमियत का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि कई प्रत्याशी अपने नाम से आधे दर्जन अकाउंट ऑपरेट करा रहे हैं। शेष पेज 15 पर
इनमें से गजेसिंह कबलाना, राकेश दौलताबाद, राव नरबीर सिंह आदि ने दो से अधिक अकांउट बना रखे हैं। हालांकि कुछ प्रत्याशियों को छोड़ दें तो नेताओं को उनके एक अकाउंट के दूसरे अकाउंट को कम लाइक्स किया गया है। कुछ नेता अपने फेसबुक वॉल पर डेली रूटीन व कार्यक्रमों का अपडेट डालते रहते हैं। इसके अलावा न्यूज पेपर्स में उनके पक्ष में लिखी खबरों को भी विशेष रूप से डाला जा रहा है।
डिमांड: चुनावी कार्यालय संभालने बढ़ी कंप्यूटर एक्सपर्ट्स की मांग
बदलते जमाने के साथ चुनाव लड़ने के इच्छुक उम्मीदवार कदमताल कर रहे हैं। वे खुद कंप्यूटर व फेसबुक-ट्वीटर फ्रेंडली हो चले हैं। उनकी अनुपस्थिति में कार्यालय और सोशल मीडिया संभालने के लिए कंप्यूटर संचालन में दक्ष युवाओं को रखा जा रहा है। पहले से सक्रिय नेताओं के यहां एक्सपर्ट की टीम काम कर रही है। वहीं मैदान में आए नए-नवेले नेता अपने परिचित व प्लेसमेंट एजेंसियों से कंप्यूटर में तकनीकी रूप से दक्ष युवाओं की मांग कर रहे हैं। नेताजी काम पर युवाओं को रखने से पहले खुद इंटरव्यू लेते हैं। सोशल मीडिया संचालन का अनुभव रखने वालों को तरजीह दी जा रही है।
कंप्यूटर टाइपिंग व सर्फिंग करने वालों को ऑन द स्पाॅट काम देख कर उनकी परख की जाती है। गुड़गांव शहर से निर्दलीय उम्मीदवार की दावेदारी पेश कर रहे एक नेताजी के कार्यालय में कुछ ऐसा ही माहौल था। यहां एक अदद कंप्यूटर एक्सपर्ट की तलाश की जा रही थी।
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