गुड़गांव। गुड़गांव-सोहना रोड पर सिग्नल रहित चौक-चौराहों पर ट्रैफिक पुलिस नहीं रहने से ट्रैफिक पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया। आलम ये था कि बीच चौक पर गाड़ियां आपस में भिड़ती रहीं और वाहन चालक आपस में एक-दूसरे से झगड़ते रहे। खासकर सुभाष चौक पर चारों ओर से आने वाले ट्रैफिक को संभालने वाला कोई नहीं था, जिससे वाहन चालकों ने खूब मनमर्जी की। हालांकि कोई बड़ी दुर्घटना नहीं हुई लेकिन चालकों ने वाहन भिड़ने पर काफी हंगामा किया।
लंबे समय से फ्लाई ओवर के निर्माण को देखते हुए सुभाष चौक से सिग्नल हटा दिया गया था। यहां स्थानीय रूप से ट्रैफिक पुलिस को लगाया गया था। लेकिन अब गुरुवार व शुक्रवार को ट्रैफिक पुलिस नहीं होने से इस चौक पर वाहन चालकों को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ा। इसके अलावा फाजिलपुर चौक पर भी कोई ट्रैफिक पुलिस कर्मचारी नहीं होने से सिग्नल की ओर किसी का ध्यान नहीं रहा।
सिग्नल ग्रीन हो या रेड, वाहन चालकों में ट्रैफिक नियमों को तोड़ने की होड़ लगी रही। इसके अलावा कस्बा बादशाहपुर के साथ लगते सेक्टर-56 चौक पर भी ऐसे ही हालत रहे। इस चौक पर कई बार बड़ी दुर्घटनाएं भी हो चुकी हैं। यहां भी ट्रैफिक पुलिस का कोई कर्मचारी मौजूद नहीं रहा और दिनभर अव्यवस्था का आलम रहा।
घर के ना घाट के रहे होमगार्ड
पुलिस विभाग से हटाए गए होमगार्ड को भारी मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। पुलिस विभाग से हटाए गए होमगार्ड की तैनाती इस साल जनवरी में ट्रैफिक पुलिस में की गई थी। होमगार्ड राकेश कुमार ने बताया कि जनवरी से 200 होमगार्ड ट्रैफिक पुलिस को अपनी सेवा दे रहे हैं। लेकिन मार्च के बाद से ही 200 होमगार्ड को वेतन नहीं दिया गया है।
विभाग की कार्यशैली से नाराज होमगार्ड गुरुवार को पुलिस कमिश्नर आलोक मित्तल से मिले। पुलिस कमिश्नर ने उनको आश्वासन दिया। जबकि डीसीपी ट्रैफिक विनोद कौशिक का कहना है कि होमगार्ड को वेतन देने के मामले की जानकारी उन्हें नहीं है। उनको वेतन उनके विभाग से ही मिलने चाहिए।
क्या कहते हैं डीसीपी ट्रैफिक
डीसीपी विनोद कौशिक ने बताया कि शुक्रवार को
मारुति कांड के आरोपियों को अदालत में पेश करने के लिए 25 ट्रैफिक पुलिस कर्मियों को मांगा गया था। इन कर्मचारियों के अदालत में चले जाने के कारण शुक्रवार को परेशानी हुई। अन्य दिन चौक-चौराहों पर ट्रैफिक पुलिस कर्मचारी तैनात रहते हैं।
(सुभाष चौक पर अस्त-व्यस्त ट्रैफिक।)