गुड़गांव। 7 जनवरी को पुलिसकर्मियों पर हुए हमले के आरोपी 20 वर्षीय मनीष यादव ने शनिवार सुबह अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। बेटे की मौत के बाद उसके पिता व अन्य परिजनों ने पुलिस कर्मियों पर आत्महत्या के लिए विवश करने का आरोप लगाया है।
युवक के पिता ने बताया कि उनका बेटा डर गया और उसने जीवन लीला समाप्त कर ली। परिजनों ने दोपहर बाद करीब तीन बजे गुड़गांव सोहना स्थित फाजिलपुर चौक को जाम कर पुलिस कर्मियों के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी और उनकी गिरफ्तार की मांग करने लगे। बादशाहपुर थाने में पुलिस कर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। पीड़ित के परिजन शाम करीब 6 बजे सड़क से हटे और अस्पताल से शव लेकर पोस्टमार्टम हाउस ले गए।
पुलिसकर्मियों पर लगा गंभीर आरोप
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मनीष के चाचा ईश्वर सिंह ने चार पुलिसकर्मियों के खिलाफ आरोप लगाया है। ईश्वर सिंह ने बताया कि मनीष ने पुलिस कर्मियों से गुस्से में लड़ाई जरूर की थी लेकिन पुलिस कर्मियों ने उसे बढ़-चढ़ कर पेश कर दिया। इन्हीं आरोपों के तहत मामला दर्ज किया गया। बकौल ईश्वर हवलदार राजेश व कोमल तथा जांच अधिकारी एएसआई नरेंद्र सिंह शुक्रवार को मनीष के घर आए थे। तीनों ने तीन लाख की डिमांड कर मनीष को पेश करने को कहा था। रकम नहीं देने पर पकड़े जाने पर मनीष को थर्ड डिग्री देने की धमकी भी दी थी। इन पुलिस कर्मियों से पहले एसीपी सदर का एक रीडर भी पांच लाख की रकम मामले को हल्का करने के लिए मांग रहा था। यह बातें मनीष के सामने आई तो वह तनाव में आ गया और शनिवार सुबह उसने कमरा बंद कर फांसी लगा ली।
क्या है मामला
गांव फाजिलपुर निवासी मनीष व उसके भाई तथा पांच अन्य लड़कों के खिलाफ सात जनवरी को सदर थाने में पुलिस कर्मियों पर कातिलाना हमला करने का मामला दर्ज हुआ था। हालांकि मामले में किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया था। मनीष व अन्य पर आरोप है कि पुलिसकर्मी राजेश व कोमल ने पुलिस नाके पर जब उन्हें जांच के लिए रोका, तो उन्होंने अपने दोस्तों को बुलाकर दोनों पुलिसकर्मियों को बुरी तरह से पीटा। इतना ही नहीं, हवलदार राजेश को स्कॉर्पियो में ठूंसकर डाल लिया गया और बेसबॉल के डंडे से पीटा गया था। इसके चलते कोमल व राजेश जिला अस्पताल में एडमिट कराए गए थे।