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उद्धाटन तो कर दिया, अब दो डॉक्टरों के भरोसे चल रही है ओपीडी

9 वर्ष पहले
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गुडग़ांव. सेक्टर-10 स्थित सिविल अस्पताल का आनन-फानन में उद्घाटन तो कर दिया गया, लेकिन मरीजों को बेहतर चिकित्सा नहीं मिल पा रही है। चिकित्सकों की कमी तो है ही, साथ ही उनके समय पर न आने से भी मरीज परेशान हैं। ओपीडी सिर्फ दो डॉक्टरों के सहारे चलाए जाने के कारण मरीजों को घंटों इलाज के लिए इंतजार करना पड़ता है।


मरीज बताते हैं कि सेक्टर 10 अस्पताल में रोज यही स्थिति रहती है। मरीज लाइन में लगकर डॉक्टरों का इंतजार करते रहते हैं। बुधवार को भी मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ा। मात्र दो चिकित्सक ही अस्पताल में थे, जिनमें एक बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. डीएस यादव (एमबीबीएस)और दंत रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुराधा शामिल थे।

चिकित्सकों की कमी के चलते डॉ. यादव ने न केवल बाल रोगियों को देखा, बल्कि खांसी-जुकाम के मरीजों की भी जांच की। मरीजों की संख्या 11.30 बजे तक तो 18 के आस-पास रही, लेकिन दोपहर तीन बजे बंद होते समय यह 50 तक हो गई।


डॉक्टर नहीं होने की वजह से मरीज कम : 8 एकड़ में फैले इस अस्पताल को डेढ़ करोड़ की लागत से तैयार किया गया था, जिसका उद्घाटन 15 अगस्त को हुआ था। अब मरीजों को चिकित्सकों की कमी खल रही है। शुरू में तो सिविल लाइन स्थित सामान्य अस्पताल के चिकित्सकों के सहारे इसे चलाया गया, लेकिन अब वे चिकित्सक भी नहीं आ रहे हैं।

चिकित्सकों के न आने की वजह से सेक्टर-10 सिविल अस्पताल की ओपीडी सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। रोजाना 30 से 50 मरीज ही जांच के लिए पहुंच रहे हैं।


मरीजों का दर्द
बच्चों की जांच कराने आई विश्वकर्मा कॉलोनी निवासी नीलम ने बताया कि अस्पताल में चिकित्सक नहीं रहते हैं। अक्सर बिना जांच कराए ही लौटना पड़ता है। गांधी नगर निवासी गणेश कुमार ने बताया कि फिजीशियन के न होने की वजह से बाल रोग विशेषज्ञ को ही चेक करा कर लौटना पड़ता है।

पत्नी के हेल्थ चेकअप के लिए आया था, लेकिन स्त्री रोग विशेषज्ञ नहीं होने के कारण लौटना पड़ रहा है। अब पत्नी को दूसरे सिविल अस्पताल जांच के लिए लेकर जाऊंगा।

मरीज बेहाल, ट्रेनिंग पर हैं डॉक्टर : सिविल लाइंस के मुख्य सिविल अस्पताल को नेशनल एक्रीडेशन बोर्ड फॉर हास्पिटल एंड हेल्थ केयर सर्विसेस (एनएबीएच) का प्रमाण पत्र दिलवाने के लिए हर सप्ताह बुधवार को चिकित्सकों को प्रशिक्षण दिया जाता है। यह प्रशिक्षण दोपहर 12 से दो बजे के दौरान दिया जाता है।

यही समय ओपीडी का भी होता है। ओपीडी के दौरान चिकित्सक प्रशिक्षण लेने में व्यस्त रहते हैं और मरीज दर्द से बेहाल उनका इंतजार करने को मजबूर हैं। सरिता और शांति ने बताया कि चिकित्सकों का प्रशिक्षण ओपीडी समय के बाद होना चाहिए।