गुड़गांव. गुड़गांव की एक कंपनी में काम करने वाली युवती के साथ कैब चालक द्वारा दिल्ली में रेप की घटना से गुड़गांव पुलिस भी सतर्क है। पुलिस कमिश्नर ने जिले के सभी कैब/टैक्सी चालकों व टैक्सी स्टैंड संचालकों की जांच करने का आदेश जारी किया है। जांच की जिम्मेवारी संबंधित क्षेत्र के एसएचओ को सौंपी गई है। इस संबंध में जल्द ही गाइडलाइंस जारी की जाएंगी।
गुड़गांव पुलिस द्वारा यहां के करीब 12 हजार टैक्सी चालकों की जांच होगी। पुलिस के लिए यह चुनौतीपूर्ण कार्य होगा। हालांकि, जिला और पुलिस प्रशासन द्वारा इस तरह के आदेश पहले भी जारी किए जाते रहे हैं, मगर कैब और टैक्सी की भारी संख्या के चलते वेरिफिकेशन की प्रक्रिया बीच में ही छोड़ दी जाती है।
इस बार दिए सख्ती के संकेत
मंगलवार की शाम को पुलिस कमिश्नर नवदीप सिंह विर्क ने सभी थाना प्रभारियों को उनके एरिया में टैक्सी स्टैंड संचालकों व टैक्सी चालकों का वेरीफिकेशन करने के आदेश जारी किए। इस बार पुलिस कमिश्नर ने संबंधित क्षेत्र के एसएचओ की जिम्मेवारी तय की है। इसमें लापरवाही बरतने पर सख्त कानूनी कार्रवाई करने की भी हिदायत दी गई है। पुलिस कमिश्नर के आदेश पर टैक्सी/कैब की जांच की तैयारी शुरू हो गई है।
आरटीओ की नहीं है जिम्मेवारी
आरटीओ विभाग के अनुसार गुड़गांव में करीब 12 हजार टैक्सी व 400 रेडियो टैक्सी चलती हैं।
आरटीओ द्वारा टैक्सी चलाने के लिए केवल परमिट जारी किए जाते हैं। वहीं रेडियो टैक्सी का परमिट चंडीगढ़ से दिया जाता है। परमिट के बाद एनसीआर में टैक्सी चलाया जा सकता है। विभागीय अधिकारी के अनुसार, परमिट देने के बाद टैक्सी कौन चला रहा है, कैसे चला रहा है और कहां चला रहा है यह देखना उनके विभाग का काम नहीं है। इसके लिए पुलिस को जिम्मेवारी सौंपी गई है।
ये हो सकते हैं दिशा निर्देश
गुड़गांव में कॉल सेंटर, एमएनसी और बीपीओ की अधिकता होने के कारण यहां हजारों महिलाएं जॉब करती हैं। इनमें से अधिकतर देर रात तक ऑफिस में काम करती हैं। इसके बाद उन्हें ऑटो या टैक्सी से अपने घर जाना पड़ता है। कई कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को टैक्सी से पिक एंड ड्रॉप की सुविधा दी है। लेकिन कई बार दिशा निर्देशों को नजरअंदाज कर दिया जाता है।
होटल में चलता था उबर का ऑफिस, अब बंद
दिल्ली में युवती से बलात्कार का आरोपी कैब चालक की कंपनी उबर गुड़गांव से ही अपना काम करती थी। दिल्ली जयपुर नेशनल हाइवे-8 स्थित सिग्नेचर टावर के पास एक होटल के तीन कमरों में उबर कंपनी ने अपना ऑफिस खोल रखा था। वारदात के बाद सोमवार को ही उबर कंपनी ने अपना ऑफिस बंद कर दिया। मंगलवार को यहां कंपनी का कोई कर्मचारी नहीं दिखा। जानकारी मिली कि दिल्ली पुलिस की एक टीम ने यहां आकर होटल कर्मचारियों से पूछताछ की। करीब डेढ़ घंटे की पूछताछ में कर्मचारियों ने दिल्ली पुलिस को बताया कि उबर कंपनी के अधिकारी यहां ड्राइवरों के दस्तावेजों की जांच करते थे। यहीं पर उन्हें कंपनी से जुड़े आवश्यक दिशा निर्देश बताए जाते थे। साथ ही ड्राइवरों को ऑनलाइन अप्लीकेशन यूज करने के बारे में जानकारी दी जाती थी। इसके बाद ड्राइवरों का एप पर अकाउंट ओपन कर दिया जाता था। हालांकि मंगलवार को उबर कंपनी के अलावा होटल के साइन बोर्ड वहां से हटा दिए गए थे।
क्या हैं हिदायतें
>श्रम विभाग द्वारा जारी दिशानिर्देश के अनुसार महिला कर्मचारी को रात के वक्त उसके घर तक छोड़ना अनिवार्य है। कैब में महिला के साथ कंपनी का एक कर्मी भी होना चाहिए जो उसके घर के पास तक जाएगा।
> प्रशासन द्वारा सभी कैब व टैक्सियों में जीपीएस लगाने की हिदायत दी जाती हैं।
> कैब व टैक्सी चालकों का पूरा ब्यौरा उसकी सेवा लेने वाले कंपनी के पास होना चाहिए।
>कैब व टैक्सी के चालकों का पूरा ब्योरा पुलिस को देने का प्रावधान है।