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सफेद कुर्ता पहनने पर दलित युवक को पीटा

10 वर्ष पहले
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अम्बाला सिटी. ठरवा गांव में अनुसूचित जाति के एक युवक की दबंग परिवार के युवक ने महज इसलिए पिटाई कर डाली क्योंकि उसने सफेद कुर्ता-पायजामा पहन लिया था। इस घटना में इससे भी बड़ी विडंबना ये कि घायल युवक सात दिन से सिटी सिविल अस्पताल में पड़ा है और पुलिस सुनवाई तक नहीं कर रही। शुक्रवार को वाल्मीकि संघर्ष समिति ने इस मामले में डीसीपी को ज्ञापन सौंपकर आरोपी के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट के तहत कार्रवाई करने की मांग की। अस्पताल में उपचार करवा रहे लखविंदर ने बताया कि 28 अप्रैल की सुबह वह अपने घर से सफेद कुर्ता-पायजामा डालकर काम पर जा रहा था। उसी दौरान गांव के ही दबंग परिवार से ताल्लुक रखने वाले एक युवक ने उस पर पीछे से लाठी से हमला कर दिया। लखविंदर के अनुसार, ‘उस युवक ने कहा-तुम्हारी जाति के लोग हमारे लोगों के सामने सफेद कपड़े पहन कर निकलेंगे तो हम ऐसे ही सबक सिखाएंगे।’ लखविंदर के अनुसार, आरोपी गांव के पूर्व सरपंच का भाई है और उसके परिवार के प्रभाव के चलते ही पुलिस कार्रवाई नहीं कर रही। पुलिस ने अभी तक उसके बयान तक दर्ज नहीं किए और उल्टा उसी पर समझौते के लिए दबाव बनाया जा रहा है। मामला गांव की पीस कमेटी को सौंपा गया है। अगर पीड़ित पीस कमेटी के फैसले से संतुष्ट नहीं होते तो शनिवार को दोनों पक्षों को थाने में बुलाकर उनसे बातचीत की जाएगी। उसके बाद ही कोई कार्रवाई की जाएगी। -भरत सिंह, एसएचओ, सदर थाना, सिटी। मेरे चचेरे भाई पर जो आरोप लगाए हैं वो गलत हैं। पूरे गांव में मामले की किसी से भी पूछताछ कर लें। हम किसी भी प्रकार की इंक्वायरी के लिए तैयार हैं। मेरा भाई पहलवानी करता है और हंसी मजाक में उससे तकरार हुई थी। अब इस मामले को तूल देकर जातीय रंग देने की कोशिश हो रही है। -पूर्व सरपंच, ठरवा गांव। पुलिस पीस कमेटी के नाम पर मामला उलझा रही है। हमले में युवक की टांग में फ्रैक्चर है और पुलिस पीस कमेटी में मामला सुलझाने की बात कर रही है। दबंगों ने जाति सूचक इस्तेमाल किए हैं। पुलिस को मामला दर्ज करना चाहिए था। अगर पुलिस कार्रवाई नहीं करती तो फिर समाज के लोग सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे। -डा. बलजीत सिंह, जिला प्रधान वाल्मीकि संघर्ष समिति। युवक से मारपीट के मामले में हुई कार्रवाई के बारे में एसएचओ से बातचीत कर उसका पक्ष जानेंगे और उसके बाद मीडिया को बता देंगे। -राजकुमार वालिया, एसीपी।