महिला ने भास्कर को सुनाई अपनी व्यथा
पति की करतूत, 30 साल से महिला कर रही अपनी बेटियों के लौटने का इंतजार
\\\"दूसरी\\\' के फेर में बेटियों को भी ले गया
एकमां को तीस साल से अपनी बेटियों का इंतजार है। दूसरी महिला के चक्कर में फंसा उसका पति उसकी दो बेटियों को हिसार में भाई से मिलाने की बात कह कर ले गया था पर आज तक वापस नहीं लौटा।
यह कहानी है शहर के कितान पाना निवासी सीता देवी की। बेटियों और पति के जाने के बाद से वह पिछले 30 साल से माथे पर बिंदिया और हाथों में रंग बिरंगी चूडिय़ां पहन रही है। लेकिन मांग में सिंदूर नहीं लगाती। वह अपने आपको विधवा मान रही और ही ब्याहता। उम्र के इस आखिरी पड़ाव पर उसे अब पति की बजाए अपनी दो बेटियों से मिलने की चाहत है।
सीता देवी की शादी 1972 में तिगड़ाना निवासी देवराज तायल के साथ हुई थी। उसने 1974, 1977 और 1980 में तीन बेटियों को जन्म दिया। इसके बाद 1982 में उसका एक बेटा पैदा हुआ। सीता देवी की माने तो 1979 में ही उसका पति किसी दूसरी महिला के चक्कर में फंस उस पर तलाक का दबाव बनाने लगा। मगर उसने ऐसा नहीं किया। सीता देवी ने बताया कि 22 अप्रैल 1984 को उसके भाई की शादी थी। इसके लिए 20 अप्रैल को पार्टी रखी तो वह अपनी चारों संतानों को लेकर वहां पहुंच गई थी। उसी दिन शाम को उसका पति भी वहां पहुंचा।
वह वहां से उसकी दो बड़ी बेटियों कविता और मनिता को यह कहकर अपने साथ ले गया कि उन्हें वह हिसार में रह रहे अपने भाई से मिलवाने जा रहा है। मगर उसके बाद तो उसका पति वापस आया और ही उसकी बेटियां उसे मिली। उसी साल 21 अप्रैल को उसके ससुर जगन्नाथ की मौत हुई तो वह अपने भाई की शादी में शामिल होने की बजाए अपनी सास नारायणी देवी के पास गई। उसने कई महीनों तक अपने पति और दोनों बेटियों के वापस लौटने का इंतजार किया। मगर जब उसे उनके बारे में कहीं खबर नहीं मिली तो उसने अपनी मांग में सिंदूर भरना बंद कर दिया, लेकिन माथे पर बिंदी और हाथों में चूडिय़ां पहननी नहीं छोड़ी। उसे उम्मीद थी कि एक एक दिन उसका पति सही उसकी बेटियां उसके पास जरूर आएंगी। इसलिए उसने अपनी एक बेटी और एक बेटे को पालने के लिए तिगड़ाना गांव में सिलाई सेंटर खोलकर लड़कियों को ट्रेनिंग देनी शुरू कर दी। वहां से मिलने वाले पैसे से ही वह अपने बेटे और बेटी का पालन पोषण करती रही। मगर दिल में यही उम्मीद रही कि एक एक दिन उसकी बेटी उसके पास जरूर आएंगी।
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