खाद की किल्लत, किसान झेल रहे जिल्लत
हरदीप बैनीवाल | हिसार/हांसी/बरवाला/ नारनौंद
अच्छेदिन आने का दावा कर सत्ता में आई भाजपा सरकार में भी किसान खाद, बीज और पानी की किल्लत झेल रहे हैं। सरकार बनते ही भाजपा के अच्छे दिन आए, मगर किसानों को खाद-पानी के लिए जिल्लत झेलनी पड़ रही है। जिले के किसी क्षेत्र में किसानों को सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल रहा तो किसी को यूरिया खाद। जिले में चार लाख चार हजार हेक्टेयर में से करीब साढ़े तीन लाख हेक्टेयर भूमि पर खेतीबाड़ी की जाती है।
जिले में यूरिया की मांग का सिर्फ 40 प्रतिशत ही मिल सका है। कुछ व्यापारियों ने किसानों से पहले खाद की खरीद का स्टॉक कर रखा है। जिसे किसानों को तय रेट से 30 से 40 रुपये ज्यादा में खाद के कट्टे की बिक्री की जा रही है। जिले में यूरिया के लिए मारामारी मची है। हिसार के अलावा, बरवाला, नारनौंद, हांसी और आदमपुर कस्बों का भी यही हाल है। किसान बार-बार मांग उठाते हैं, मगर इसे लेकर तो सरकार गंभीर है और अधिकारी।
सहकारी सोसायटी केंद्रों पर यूरिया लेने के लिए किसानों की मारामारी चल रही हैं। वहीं अधिकारी यूरिया की थोड़ी कमी एक सप्ताह देरी से आने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ने में लगे हैं। जिले में करीब 283 सहकारी सोसायटी केंद्रों पर खाद किसानों को बांटी जाती है। अक्टूबर से नवंबर तक जिले में करीब हजारों मीट्रिक टन यूरिया की खपत होती है।
^यूरिया खाद की सप्लाई में एक सप्ताह की देरी हुई है। यूरिया की जिले में उतनी कमी नहीं है जितनी किसान दिखा रहे हैं। प्रत्येक किसान को पांच कट्टे दिए जा रहे हैं। कुछेक किसान जरूरत से ज्यादा यूरिया ले रहे हैं, जिस कारण यूरिया की कुछ हद तक कमी बनी है। अगले सप्ताह तक 13 हजार मीट्रिक टन यूरिया के आने की संभावना है। कालाबाजारी नहीं हो रही है, अगर कहीं ऐसा है तो तुरंत उसकी शिकायत करें। सोसायटी केंद्र पर खाद वितरण करते समय एडीओ साथ में होते हैं जिससे कालाबाजारी नहीं हो सकती।\\\'\\\' डॉ.विनोद फौगाट, कृषिउप निदेशक, हिसार।
गांवों में सोसायटी केंद्रों पर किसानों के लिए यूरिया खाद उपलब्ध करवाई जाती है। इस बार यूरिया खाद की कमी के कारण किसानों को भारी दिक्कतें उठानी पड़ रही हैं। खाद लेने के लिए किसान सुबह ही सोसायटी केंद्रों पर पहुंच जाते हैं, लेकिन घंटों लाइन में लगने के बाद भी उन्हें खाली हाथ घर लौटना पड़ता है।
खाद के लिए लाइनें
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