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आवारा कुत्तों ने अब नील गाय के बच्चे को नोचा

7 वर्ष पहले
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चारदिन पहले सिसाय में तीन साल की एक बच्ची का चेहरा नोचने वाले कुत्तों ने रविवार को नील गाय के एक बच्चे को निशाना बनाया। आधा दर्जन से अधिक कुत्तों ने कृष्ण कालीरामन के खेत में नील गाय के बच्चे को घेर लिया और नोचना शुरू कर दिया। खेत मालिक ने कुत्तों के भगाना चाहा, तो वह उस पर भी झपटे।

किसान के बुलावे पर अन्य लोग भी इकट्ठे होकर मौके पर पहुंचे और नील गाय के बच्चे को कुत्तों से मुक्त कराया। कुत्ते तब तक उसकी एक टांग को नोच चुके थे। लोगों ने घटना की जानकारी वन्य प्राणी विभाग को दी। नील गाय के घायल बच्चे को वाहन में उपचार के लिए हिसार भेजा गया।

घटना सवेरे करीब आठ बजे कृष्ण कालीरामन के खेत में हुई। कृष्ण अपने खेत में पहुंचे थे कि उन्होंने देखा कि कुछ कुत्तों ने नील गाय के एक बच्चे को घेर रखा है। उन्होंने कुत्तों को भगाने की कोशिश की तो वह उन पर ही झपटने लगे। कृष्ण ने तत्काल टेलीफोन कर मामले की जानकारी अन्य लोगों को दी।

सरपंच अजीत कालीरामन, बादल सिहाग, संदीप बूरा दिलबाग सिहाग सहित कई लोग मौके पर पहुंचे और नीलगाय के बच्चे को आवारा कुत्तों से मुक्त कराया। लेकिन तब तक कुत्ते नील गाय के बच्चे का एक पैर नोचकर लगभग खा चुके थे। घटना से तत्काल वन्य प्राणी विभाग को अवगत कराया गया। इसके बाद नील गाय के घायल बच्चे को उपचार के लिए हिसार भेजा गया।

उपमंडलमें कुत्तों की स्थिति

पशुपालनविभाग की तरफ से हाल ही में कराए गए एक सर्वे के अनुसार उपमंडल में 24 हजार से अधिक ऐसे कुत्ते खुले घूम रहे हैं, जिनके कोई मालिक नहीं। इनमें करीब 2200 कुत्ते पालतू हैं। शहर में ऐसे कुत्तों की संख्या करीब ढाई हजार है, जिनके कोई मालिक नहीं हैं। इन पर ध्यान दिया जाना बहुत जरूरी है।

सिसाय में कुत्तों द्वारा नोचा गया नीलगाय के बच्चे का पैर।

सिविल अस्पातल में इस साल नवंबर तक 1662 लोग कुत्ते के काटने पर उपचार के लिए पहुंच चुके हैं। मतलब, प्रतिदिन पांच से अधिक की औसत दर से लोग कुत्तों के काटने के बाद उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। यह आंकड़ा सिर्फ सिविल अस्पताल का है। निजी अस्पतालों में जाने वालों की संख्या इससे अलग है।\\\'\\\'

डॉ.राहुल बुद्धिराजा, एसएमओ

आवारा कुत्तों को मारने की इजाजत नहीं है। कुछ महीने पहले ऐसे कुत्तों की नसबंदी करने की योजना आई थी। योजना को केंद्र के एक एजीओ की तरफ से चलाया जाना था। विभाग