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अनशन पर बैठे किसानों की जान गई तो सरकार जिम्मेदार होगी

7 वर्ष पहले
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भाजपाकिसानों की बदौलत सत्ता में आई है और अब सरकार किसानों की मांगों को नजरअंदाज कर रही है। पानी की मांग को लेकर आमरण अनशन पर बैठे किसानों की अगर जान चली जाती है तो इसकी जिम्मेदारी प्रदेश सरकार की होगी। यह चेतावनी लघु सचिवालय के बाहर जल साझा संघर्ष समिति के बैनर तले चौथे दिन आमरण अनशन पर बैठे किसानों ने दी। किसान पिछले 27 दिन से एक माह में 16 दिन नहरी पानी छोड़ने की मांग को लेकर धरने पर बैठे हैं।

किसानों ने चेतावनी दी कि अगर आमरण अनशन पर बैठे किसी किसान को कुछ हो जाता है तो इसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी और उसके बाद कोई भी बड़ा आंदोलन टाला नहीं जा सकेगा।

आंदोलन बढ़ सकता है

प्रशासन सरकार से मांगों को मनवाने के लिए संघर्ष समिति की सोमवार को बैठक हाेगी। बैठक में समिति सदस्य आंदोलन तेज करने को लेकर विचार विमर्श कर आगामी रणनीति तैयार करेंगे। समिति सचिव ने बताया कि अब वे बड़ा आंदोलन करने से भी पीछे नहीं हटेंगे।

आज होगी समिति की बैठक

अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे किसानों को संबोधित करते हुए सचिव विक्रम श्योराण ने कहा कि प्रदेश में भाजपा पहली बार किसानों के दम पर सरकार बनाने में कामयाब हुई है।

सरकार कर रही शोषण