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खंडवा बांधकर क्लास में पहुंचा लॉ स्टूडेंट, बाहर निकालने पर हंगामा

6 वर्ष पहले
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छाजूराम लॉ कॉलेज में एक छात्र के खंडवा बांधकर क्लास में आने पर हंगामा हो गया। कॉलेज प्रबंधन ने छात्र को क्लास से बाहर निकाला तो दूसरे विद्यार्थियों ने भी कक्षाओं का बहिष्कार कर दिया। उनका तर्क था कि जब जींस और टॉप पहनकर स्टूडेंट कॉलेज में सकते हैं तो हम पारंपरिक परिधान में क्यों नहीं। वे कॉलेज प्रबंधन और प्राचार्य के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। करीब आधा घंटे के बाद आश्वासन मिलने पर ही मामला शांत हुआ। कॉलेज प्रबंधन ने कहा कि छात्र के परिजन सहमत हैं तो छात्र खंडवा बांधकर सकता है। क्योंकि परिवारों में बुजुर्ग की खंडवा बांधते हैं।

हुआ यह कि शनिवार को छाजू राम लॉ कॉलेज में एलएलबी तृतीय वर्ष (अंतिम वर्ष)का छात्र दिनेश कमीज-पायजामा पहनकर और खंडवा बांधकर गया। इस दौरान बार काउंसिल ऑफ इंडिया की टीम की मौजूदगी में कक्षाओं की वीडियोग्राफी चल रही थी। कॉलेज के तृतीय वर्ष के छात्रों ने बताया कि पॉलिटिकल साइंस का लेक्चर चल रहा था और उनकी क्लास में प्राचार्य कृष्ण कुमार काजल और लेक्चरर नरेश महिपाल गए। क्लास में आते ही दिनेश के खंडवा पहने होने पर ऐतराज जताते हुए बिना चेतावनी दिए धक्के मारकर उसे बाहर कर दिया। छात्रों का कहना है कि कॉलेज में कोई ड्रेस कोड नहीं है और अपनी मर्जी से जब छात्र जींस और टोपी, धोती पहनकर अाते हैं तो खंडवा पहनने पर ऐतराज क्यों है। कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर विकास चौधरी ने बताया कि छात्र दिनेश हमेशा कॉलेज में सुर्खियों में आने का प्रयास करता रहता है। कभी कक्षा में मरा हुआ सांप लेकर पहुंच जाता है तो कभी कक्षा में विग लगाकर जाता है। अनुशासनहीनता के मामले में कई बार उसे चेतावनी दी गई है। जब कॉलेज स्टाफ से छात्रों के प्रतिनिधिमंडल ने मामले को लेकर बात की तो स्टाफ सदस्यों ने छात्र के खंडवा बांधने की बात पर हामी भर ली। लेकिन इसके लिए उसके परिजनों को इस पर सहमति जतानी होगी।

कोर्ट में खंडवा बांधकर नहीं कर सकते वकालत

उधर,शिक्षकों का कहना था कि लॉ करने के बाद आप वकालत करने जाएंगे तो तो कमीज पाजामा और खंडवा बांध सकते।

{ बोले- जब सब जींस और टोपी पहन सकते हैं तो ये कुर्ता पायजामा, खंडवा क्यों नहीं

खंडवा पहने छात्र को क्लास से बाहर निकालने के विरोध में नारेबाजी करते छात्र।

छात्रों का कहना था कि बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में छात्र पगड़ी पहन कर और तिलक लगाकर जा सकते हैं तो यहां क्यों नहीं।