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अभिमान छोड़कर ज्ञानी बनें : संत सुखदेवानंद
हिसार | श्रीयोगअनुभव सेवा समिति के तत्वावधान में शनिवार को शांति नगर में आयोजित सत्संग के दौरान प्रवचन देते हुए संत सुखदेवानंद ने कहा कि भगवान को पाने के लिए केवल प्रेम की आवश्यकता है। भव से पार होने के लिए भाव की जरूरत है। रावण ज्ञानी था परंतु अभिमानी था। जीवन में ज्ञानी होना श्रेष्ठ है परंतु अभिमान रहित होना चाहिए। कुंभकर्ण बलवान था परंतु आलसी था। सत्संग में साध्वी निजआत्मयोगानंद ने भी प्रवचन दिए। सत्संग में साध्वी सर्वयोगानंद ने भजनों के माध्यम से समा बांध दिया। भजनों पर श्रद्धालु झूमते रहे। मंच संचालन घनश्याम पपनेजा ने किया। सत्संग स्थल पर पहुंचने पर संत सुखदेवानंद महाराज का सत्या कोहली, सुधीर कोहली उर्मिला याणा ने महाराज का स्वागत किया। इस अवसर पर रामप्रकाश बजाज, कश्मीरी लाल माटा, जवाहर लाल काठपाल, लवली राजपाल, विपिन माटा, मनोहर नांगरू, जितेन्द्र भ्याणा, रमेश सैनी, राजकुमार ललित, राज, प्रवीण, आशु, संतोष आदि थे।