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सिविल अस्पताल में हर रोज रहे 10 से 15 डायरिया के मरीज

7 वर्ष पहले
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डिप्टी सीएमओ अशोक चौधरी ने बताया कि वायरल संबंधी बीमारियों पर काबू करने लिए स्वास्थ विभाग की ओर से घर-घर जाकर ओआरएस घोल बच्चों को पिलाया था। विभाग भविष्य में भी ऐसे अभियान चलाएगा।

फिजीशियन ज्ञानेंद्र सिंह का कहना है कि मौसम में लगातार होते बदलाव के कारण वायरल संबंधी बीमारियां बढ़ जाती है। क्योंकि कभी धूप और कभी बरसात का मौसम इंसान के शरीर को प्रभावित करता है।

डायरिया के लक्षण

>सफाई का विशेष ध्यान रखें, खाना खाने और बनाने से पहले हाथों को अच्छी तरह साफ करें।

>साफ पानी का सेवन करें। चाहे तो पानी को उबालकर पिएं।

>कटे फल और ठंडे पेयजल सहित अन्य पेय से परहेज करें।

>खाने को ढककर रखे और फ्रीज में रखे खाने को गर्म करके खाएं।

>उल्टी, दस्त की शिकायत।

>भूख लगना भी कारण।

>पेट में दर्द की शिकायत।

>वायरल फीवर का होना।

>शरीर में पानी की कमी होना।

>गले और सिर में दर्द के साथ कमजोरी होना।

भास्कर न्यूज | हिसार

बदलतेवातावरण के कारण सिविल अस्पताल में डायरिया, बुखार और गले में इंफेक्शन के रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है। जच्चा बच्चा वार्ड से लेकर अन्य वार्डों में इन बीमारियों से ग्रसित मरीजों की लंबी कतार है। अस्पताल में आने हर पांचवां मरीज बरसाती मौसम की बीमारियों की चपेट में है। ऐसी बीमारियों पर लगाम कसने के लिए स्वास्थ विभाग ने अभियान भी चलाया था। सामान्य अस्पताल में प्रतिदिन डायरिया के करीब दस से पंद्रह मरीज रहे हैं। इनमें बच्चें और बड़े दाेनों रोगी शामिल हैं। इन मरीजों में अधिकतर संख्या बच्चों की है। इनमें ज्यादातर बच्चे या तो ग्रामीण परिवेश से आते है या फिर शहर के उन क्षेत्रों से आते है जहां गंदगी ज्यादा रहती है। साथ ही गले में इंफेक्शन के मरीज भी बढ़ रहे है। डॉक्टरों का कहना है कि ऐसे मौसम में इंफेक्शन तेजी से फैलता है। घर में एक सदस्य को इंफेक्शन होने पर अन्य सदस्य भी इसकी चपेट में जाते है।

कभी बरसात तो कभी तेज धूप की वजह से बदलते मौसम में वायरल के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इनमें सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों को हो रही है। क्योंकि बच्चे सुबह से शाम तक बदलते मौसम का असर झेलते है। ऐसे में बच्चों को उल्टी, दस्त और बुखार की बीमारियां चपेट में ले लेती है। इसी तरह अन्य लोग भी इन बीमारियों से पीड़ित है। वही डॉक्टरों का कहना है