पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • एएनएम और आशा घर घर पहुंच शिशु की तंदुरुस्ती के देंगी टिप्स

एएनएम और आशा घर-घर पहुंच शिशु की तंदुरुस्ती के देंगी टिप्स

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
{नवजातों को जन्मजात बीमारियों से बचाने के लिए नवदंपतियों को किया जाएगा जागरूक

भास्करन्यूज | हिसार

जिंदगीको खुशहाल बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग अब नवजात बच्चों के स्वास्थ्य पर खास फोकस करेगा। इसके लिए विभाग ने कमर कस ली है। एएनएम और आशा वर्कर्स की टीम घर-घर जाकर अभिभावकों को जागरूक करेंगी, ताकि उनके घर तंदुरुस्त बच्चा पैदा हो। इसके लिए विभाग ने हाल ही में प्री कंसेप्शन केयर स्कीम शुरू की है, ताकि शिशु मातृ मृत्यु दर में गिरावट सके। साथ ही बच्चों को जन्म से पहले ही जन्मजात विकारों से बचाया जा सके।

प्री कंसेप्शन केयर स्कीम के तहत बच्चे के जन्म से पहले ही नवदंपती को नवजात की सुरक्षा से संबंधित जानकारी दी जाएगी। स्वास्थ विभाग के अधिकारियों ने बताया कि स्कीम को सही तरीके से घर-घर पहुंचाने के लिए एएनएम और आशा वर्करों की सेवाएं ली जाएंगी। साथ ही स्वास्थ विभाग की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों में नवदंपती को विशेष बधाई पत्र भेजे जाएंगे। इसी तरह परिवार नियोजन की योजनाओं के बारे में जानकारी दी जाएगी। प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली समस्याओं के साथ जन्म से पहले बच्चे में होने वाले रोगों के बारे में बताया जाएगा।

ग्रामीण परिवेश में है ज्यादा परेशानी

स्वास्थविभाग ने इस स्कीम को ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं को ध्यान में रखते हुए लागू किया है, क्योंकि ग्रामीण परिवेश की अधिकतर महिलाएं गर्भावस्था के छह महीने तक भी उपचार के लिए नहीं जाती है। जबकि बच्चे में जन्मजात विकार अन्य कमियों के मामले पहले तीन महीनों में ही शुरू होने लग जाते हैं। इससे माता और शिशु स्वस्थ नहीं रहते और कई मामलों लापरवाही बरतने से शिशु या माता की मृत्यु तक हो जाती है।

ये बीमारियां जकड़ती हैं नवजात को चंगुल में

प्रेगनेंसीसे पहले और उसके बाद सावधानियां नहीं बरते जाने के कारण कई केस में बच्चों में जन्मजात विकार हो जाते हैं। इससे कुछ मामलों में कटे-फटे होंठ तालू, मस्तिष्क विकृति, मस्तिष्क हर्निया, बच्चों में होने वाले कैंसर, मंद बुद्धि, विकासात्मक विकलांगता, कम वजनी बच्चे बौनापन आदि की समस्या हो जाती है। ऐसे हालत में बच्चा सामान्य जिंदगी नहीं जी पाता और उम्रभर के लिए दूसरों पर निर्भर होकर रह जाता है और परेशानियां झेलता है। विभाग की योजना यदि सफल हुई तो इससे बच्चे इन विकारों से तो बचेंगे ही साथ ही शिश