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खुद की सेफ्टी में जुटे डॉक्टर मरीजों,अटेंडेंन्ट पर ध्यान नहीं
स्वाइन फ्लू के प्रकोप से बचने के लिए सिविल अस्पताल का स्टॉफ खुद की सेफ्टी में तो जुट गया है, लेकिन अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों को किसी की परवाह नहीं है। ऐसा ही मामला शुक्रवार को सिविल अस्पताल में हुआ। स्वाइन फ्लू का एक संदिग्ध जांच के लिए आया। डॉक्टरों ने उसे आइसोलेशन वार्ड में रखने की बजाए इमरजेंसी में भर्ती कर दिया। संदिग्ध मरीज के भर्ती होते ही इमरजेंसी में कार्यरत स्टॉफ ने अपनी सेफ्टी के लिए तो तुरंत मास्क लगा लिए, लेकिन इमरजेंसी में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों के बारे में किसी ने चिंता नहीं की। जबकि स्वाइन फ्लू एक ऐसा वायरस है जो कि एक मरीज से दूसरे में बहुत जल्द फैलता है। इसके बाद अस्पताल प्रशासन की तरफ से संदिग्ध मरीज को प्राथमिक तौर पर टेमीफ्लू उपलब्ध करवाई। साथ ही जांच के लिए सैंपल दिल्ली लैब में भेज दिया गया।
4साल पहले मिले थे स्वाइन फ्लू के लक्षण
अस्पतालप्रशासन स्वाइन फ्लू को लेकर कितना सर्तक है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जो संदिग्ध इमरजेंसी में भर्ती किया गया था उसमें वर्ष 2010 में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई थी। दोबारा से स्वाइन फ्लू की आशंका के कारण परिजन उन्हें सिविल अस्पताल लेकर अाए थे। जानकारी के अनुसार संदिग्ध मरीज एक प्रशासनिक अधिकारी है।प्रदेश में अलर्ट जारी होने के बाद सिविल अस्पताल में फौरी तौर पर स्वाइन फ्लू के मरीजों के लिए अलग से आइसोलेशन वार्ड बनाया था, लेकिन हालत ये है कि हिसार में 8 मामले पॉजिटिव आने के बावजूद आजतक किसी मरीज को आइसोलेशन वार्ड में भर्ती नहीं किया गया है। करीब पंद्रह दिन पहले एक मरीज भर्ती होने के लिए सिविल अस्पताल में आया था, लेकिन उसे अग्रोहा रेफर कर दिया गया था। आइसोलेशन वार्ड की मौजूदा स्थिति पर नजर डाले तो यहां ऑक्सीजन और स्वाइन फ्लू बचाव किट ही उपलब्ध है।
सिविल अस्पताल में अभी तक स्वाइन फ्लू के 91 सैंपल जांच के दिल्ली लैब में भेजे गए है। शुक्रवार तक 75 की रिपोर्ट आई है। स्वाइन फ्लू के नोडल ऑफिसर सुशील गर्ग ने बताया कि भेजे गए सैंपल में से 62 की रिपोर्ट निगेटिव आई है। जबकि 14 की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है।
अभी तक मिले कुछ 14 पॉजिटिव मरीजों में 8 मरीज हिसार के हैं, जबकि 6 बाहरी जिले के हैं। इनमें सिरसा, भिवानी, हनुमानगढ़ सहित अन्य जिलों के मरीज शामिल हैं। नोडल ऑफिसर ने बताया कि हिसार के कुल आठ मरीजों में से 7 का उपचार घर पर ही चल रहा है, जबकि एक मरीज शहर के निजी अस्पताल में उपचाराधीन है।
{ खांसी जुकाम हो तो मुंह पर रुमाल रखें।
{ भीड़भाड़ क्षेत्र में मुंह पर कपड़ा रखें।
{ हाथ को बार-बार साबुन से साफ करें।
{ मुंह पर कम हाथ लगाएं।
{ छींकते समय हमेशा अपनी नाक और मुंह पर कपड़ा रखे। इसके बाद हाथ जरूर धोएं।
स्वाइन फ्लू एक वायरस है। स्वाइन फ्लू आमतौर पर सुअरों के संपर्क में रहने वालों व्यक्तियों में फैलने की ज्यादा संभावना रहती है, क्योंकि इसे सुअरों का बुखार भी कहा जाता है। एक व्यक्ति में फैलने के बाद संपर्क में आने वाले अन्य लोगों में वायरस के फैलने की आंशका बढ़ जाती है। मरीज को आइसोलेशन वार्ड में ही भर्ती किया जाता है।
{ वार्ड को साफ सुथरा रखना।
{ किसी भी व्यक्ति से मिले तो उसके बाद हाथ साबून से जरूर धोएं।
{ वार्ड में जाने से पहले मुंह पर कोई कपड़ा या मास्क लगाये।
{ अगर कोई स्वाइन फ्लू का मरीज वार्ड में आने के बाद उसके कमरे में सीधा जाये।