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कोक्लियर इम्प्लांट सर्जरी से दूर होगा बहरापन : डॉ. किरताने
जिंदल अस्पताल में दो बच्चों की हुई सर्जरी
अच्छी खबर
बहरेपन का शिकार हुए पांच साल तक के बच्चों के लिए यह खबर अच्छी है। मुंबई से आए पद्मश्री डॉ. एमवी किरताने के निर्देशन में शहर के जिंदल अस्पताल में बहरेपन के शिकार दो बच्चों की कोक्लियर इम्प्लांट सर्जरी की गई। जो पूरे हरियाणा में ऐसी पहली सर्जरी है। शनिवार को मुंबई के हिंदूजा अस्पताल के पद्मश्री डॉ. किरताने जिंदल अस्पताल अाएं। उन्होंने अस्पताल की वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. माधुरी मेहता के साथ मिलकर जालंधर निवासी छह वर्षीय बच्ची प्रिंसा और राजस्थान निवासी चार वर्षीय बच्चे खेवत की कोक्लियर इम्प्लांट सर्जरी की। डॉ. किरताने ने बताया कि हरियाणा में यह पहली सर्जरी है। इस तरह की इससे पहले देश के विभिन्न अस्पतालों में वह करीब 1900 सर्जरी कर चुके हैं, जो पूरी तरह सफल साबित हुई है। इस दौरान उन्होंने अस्पताल में आयोजित सेमिनार में अभिभावकों को भी कोक्लियर इम्प्लांट सर्जरी की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यदि अभिभावकों को पता चलता कि उनका बच्चा बहरेपन का शिकार है तो वह पांच वर्ष से पहले उसकी यह सर्जरी करा सकते हैं। हालांकि सर्जरी पांच वर्ष की उम्र के बाद भी हो सकती है, लेकिन उसके लिए काफी जांच-पड़ताल करनी पड़ती है और फिर भी सफल होने की गारंटी नहीं दी जा सकती है। इस मौके पर डायरेक्टर डॉ. शेखर सिन्हा, डॉ. शिव कुमार सिंगल और डॉ. गुरुदयाल आदि मौजूद थे।
क्याहै कोक्लियर इम्प्लांट सर्जरी
कोक्लियरकान के परदे के पीछे लगा कान का एक अंग होता है, जो आवाज की ध्वनि को दिमाग तक पहुंचाता है। इसके बाद व्यक्ति आवाज सुनकर उसे समझने की क्षमता रखता है। इस सर्जरी के माध्यम से कान के पीछे एक मशीन लगाई गई, जिसके बाद टांके लगाकर उसे अंदर बंद कर दिया जाएगा। इसके बाद कान के बाहर श्रवण यंत्र की तरह की एक छोटी मशीन लगाई जाएगी, जिसे बच्चा जब चाहे उतार कर भी सकता है।
केंद्र सरकार देती हैं छूट
डॉ.किरताने के मुताबिक, कोक्लियर इम्प्लांट सर्जरी में करीब साढ़े छह लाख का खर्च आता है, लेकिन इसके लिए केंद्र सरकार ने पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए स्कीम भी लागू कर रखी है। मेडिकल जांच के दौरान यदि सौ फीसदी साबित हो जाता है कि बच्चे में सुनने की क्षमता बिल्कुल नहीं है। ऐसे में केंद्र सरकार बच्चे की मदद के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराती है।