ये दीवार ढहे तो दिलों को सुकून मिले
हाउसिंगबोर्ड के गेट नंबर 6 काे बंद करने का मामला रिश्तों पर भारी पड़ा है। यकीनन दोनों कॉलोनीवासियों को पहले जैसे आपसी मेल मिलाप की कमी खल रही है। परिस्थितियां बदलने से दोनों कॉलोनी के लोगों के दिलों में मतभेद पैदा जरूर हुए हैं, पर मनमुटाव दीवार गिरने के साथ ही खत्म होने की उम्मीद भी बरकरार है। चंद दिन पहले तक हाउसिंग बोर्ड और विद्युत नगर के लोग एकसाथ पार्क में बैठकर दुख-सुख साझा करते थे। बुजुर्ग महिलाएं सुबह इकट्ठे मॉर्निंग वाक और शाम को भजन संध्या करती थीं। मगर पिछले एक सप्ताह से गेट बंद करने का मामले ने जब से तूल पकड़ा है तब से ही दानों पक्षों में तनाव चल रहा है। तनाव के कारण अर्बन एस्टेट निवासी कुछेक बुजुर्ग भी आहत हैं। हाउसिंग बोर्ड के लोगों की पार्क में एंट्री बंद हो गई। पहले एक साथ मॉर्निंग वाक करना, शाम को पार्क में बैठकर भजन-कीर्तन के बाद गप्पे मारना आदि हाउसिंग बोर्ड निवासी महिलाओं की दिनचर्या में शुमार था। लेकिन पिछले कुछ दिनों से दोनों कॉलोनियों के लोगों के बीच दीवार खड़ी करने को लेकर हुआ मतभेद पुराने रिश्तों पर भारी पड़ गया।
गेट नंबर 6 के सामने खींची गई दीवार का फाइल फोटो।
गेट नंबर 6 पर खड़ी चार फुट की दीवार को लेकर एसडीएम के सामने विभागीय अधिकारी पेश होंगे। हुडा, हाउसिग बोर्ड, टाउन प्लानिंग और निगम के अधिकारी सोमवार को अपना-अपना पक्ष रखेंगे। शनिवार को एसडीएम अशोक कुमार बंसल ने दोनों पक्षों को मामले की सुनवाई के लिए सोमवार का समय दिया था।
हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी निवासी मुन्नी देवी का कहना है कि भजन संध्या के बाद हम सब इकट्ठे बैठकर गप्पे मारते थे। महिलाओं की टोली में बैठकर सुख-दुख साझे करते थे। सबकी खुशी में महिलाएं शरीक होती तो दुख की घड़ी में ढांढ़स बंधाने में पीछे नहीं हटती थीं। पिछले एक सप्ताह जब से दोनों कॉलोनियां के रिश्तों में दरार अाई है, तब से पहले के ये अनुभव उन्हें खूब याद रहे हैं। पर कर भी क्या सकते हैं।
उषा देवी का कहना है कि समय के करवट लेने से हमारे रिश्ते बिगड़े जरूर है, पर अब भी पूरी तरह से रिश्ते खत्म नहीं हुए हैं। नोक-झोंक किस परिवार में नहीं होती, हमारी दोनों कॉलोनियां भी एक परिवार की तरह ही है। उम्मीद है कि मतभेद जल्द दूर होने पर ये दीवार गिर जाएगी, जिसके बाद फिर से दोनों कॉलोनियां के रिश्तों में आई कड़वाहट दूर हो जाएगी और फिर से हम एक-दूसरे के साझी बन जाएंगे।
अर्बन एस्टेट निवासी चांदीराम सांगवान का कहना है कि वे कई वर्षों से सुबह और शाम पार्क में घूमने आकर विद्युत नगर के लोगों के साथ योग करते थे, जो कि उनकी दिनचर्या का सबसे अहम हिस्सा था। विवाद के बाद से उनकी एंट्री विद्युत नगर में बंद हो गई है। मजबूरीवश सुबह सड़क पर ही उन्हें मॉर्निंग वाक करनी पड़ती है जबकि शाम के समय पिछले एक सप्ताह से वो घर ही रहते हैं। चूंकि शाम के समय सड़क पर वाहनों की भरमार रहती हैं।
हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी निवासी सुशीला देवी का कहना है कि पहले पार्क में बैठकर भजन-कीर्तन करते थे, आपस में दुख-सुख साझे कर लेते थे। दीवार बनने से अचानक से सब खत्म सा हो गया है। एक दीवार ने वर्षों के रिश्तों काे ही तोड़ कर रख दिया है। हमने तो कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि परिस्थितियां अचानक बदल जाएंगी। रिश्तों में मिठास कड़वाहड़ का रूप ले लेगी।