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हॉस्टल में काले साये के भय में छात्राएं बेहोश, ओपीडी में सांप निकला ताे डॉक्टर-रोगी भागे
सिविलअस्पताल में बुधवार रात और गुरुवार सुबह अफरातफरी का माहौल रहा। दरअसल, अस्पताल के नर्सिंग हॉस्टल की छात्राओं ने शिकायत की कि उन्होंने काले कपड़े वाले किसी साये को देखा है। इससे घबराकर रात को दो छात्राएं भूत-भूत चिल्लाती हुईं बेहोश हो गईं, उन्हें अस्पताल की एमरजेंसी वार्ड में भर्ती करवाया गया। वहीं सुबह भी दो छात्राएं बेहोश हो गईं। इनमें एक वह छात्रा थी जो रात को भी बेहोश हो गई थी। वहीं सुबह ओपीडी के कमरा नंबर सात में मरीजों की जांच के दौरा सांप के आने से डॉक्टरों और मरीजों में दहशत फैल गई।
बीती रात नर्सिंग छात्राएं हॉस्टल में सोई हुई थी। इसी दौरान दो छात्राएं एक कमरे में पढ़ाई कर रही थीं। तभी उनमें से एक छात्रा किसी काम से कमरे से बाहर आई। तो छात्रा को हॉस्टल परिसर में काले कपड़ों में एक साया नजर आया। इसके बाद छात्रा ने अपनी सहेली को आवाज लगाई। साये की हलचल होने पर दोनों छात्राओं के मुंह से चीख निकल गई। छात्राओं ने भूत भूत चिल्लाकर शोर मचाया। इस पर पूरे हॉस्टल में अफरातफरी मच गई। भय के कारण दोनों छात्राएं बेहोश हो गईं। बेहोशी की हालत में इमरजेंसी में भर्ती कराया गया। करीब एक घंटे बाद छात्राओं को होश आया। तब भी छात्राएं घबराई हुई थी। इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने जानकारी छात्राओं के परिजनों को दी।
डरके कारण सुबह दो छात्राएं फिर बेहोश
वहींहॉस्टल में जैसे जैसे भूत की चर्चा चली तो इससे घबराकर गुरुवार सुबह दो छात्राएं फिर से बेहोश हो गई। इनमें एक छात्रा वही थी जो रात को भी बेहोश हो गई थी। दोनों को इमरजेंसी में भर्ती कराना पड़ा। अब भी छात्राओं में किसी काले साये की चर्चा को लेकर भय बना हुआ है। हॉस्टल की छात्राएं सहमी हुई हैं।
^भूत या काले साये जैसी कोई चीज नहीं होती है। कभी कभी हारर मूवी देखने, भूतों से संबंधित कोई स्टोरी सुनने और ऐसी ही किसी बातचीत इंसान काे मानसिक तौर पर परेशान कर देती है। इससे इंसान उसी तरह की चीजों के बारे में सोचने लगता है। जबकि ऐसा कुछ होता नहीं है।\\\'\\\' डॉ.संदीप राणा, मनोवैज्ञानिक,विभागाध्यक्ष जीजेयू।
^सिविलअस्पताल के नर्सिंग हॉस्टल में पत्थर फेंके जाने की सूचना मिली थी। मगर इस मामले में पुलिस के पास कोई शिकायत नहीं आई है। हेडकांस्टेबल, अनाजमंडी चौकी
दिनभर कुर्सियां पड़ी रहीं खाली
वहींसांप की दहशत के कारण कमरा नंबर 7 में बनी ओपीडी