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भगवान के भक्त को कभी अभिमान नहीं होता है : साध्वी करुणागिरि
नईअनाज मंडी में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन प्रवचन देते हुए साध्वी करुणागिरि ने कहा कि श्रीमद्भागवत 18 पुराणों की एक सर्वगुण कथा है। व्यास जी ने सूत जी को कथा सुनाई थी और सूत जी ने शोनाकदि ऋषियों को दस हजार बार यह कथा सुनाई। इस कथा का अंत नहीं है। उन्होंने कहा कि जो भगवान का भक्त होता है, उसकी भक्ति करता है, भगवान उसे कभी हारने नहीं देते।
उसे अपने हृदय में रखते हैं और अपने धाम में जगह देते हैं। भगवान के भक्त में कभी अभिमान नहीं होता। उन्होंने मंगलवार को अंतिम दिन की कथा में सत्यभामा की यदुवासियों के श्रापित होने की कथा सुनाई। साध्वी करुणागिरि ने बाद में कृष्ण-सुदामा की मित्रता का प्रसंग सुनाया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भाव विभोर हो उठे। उन्होंने कहा कि मित्रता अमीरी गरीबी नहीं देखती। सच्चा मित्र वहीं होता है, जो विपत्ति में मित्र के काम आए। कृष्ण ने साधन सम्पन्न होने पर भी अपने मित्र सुदामा के मुट्ठी भर चावल को भी बड़े चाव से खाया। इस मौके पर कृष्ण-सुदामा की मित्रता को चरितार्थ करती झांकी निकाली गई। इस मौके पर शिव कुमार सिंगल, सज्जन गुप्ता, वासुदेव, विनोद, मनीष, नागपाल, देवेन्द्र, श्याम बिहारी सिंगल, विजय मोहन सिंगल, रामकुमार, कपिल, डोली, लक्ष्मी, वेद प्रकाश, रोहतास सहित अन्य उपस्थित थे।
नई अनाज मंडी में जारी श्रीमद्भागवत कथा के दौरान झांकी में सुदामा के पैर धोते भगवान कृष्ण।