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प्रकृति का दोहन हो, शोषण नहीं : कुठियाला

7 वर्ष पहले
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विचार गोष्ठी में मौजूद माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विवि के वीसी प्रो. बीके कुठियाला, प्रो. ऋषि गोयल, प्रो.केसी अरोडा, डाॅ. कुलदीप शर्मा डाॅ.कमल गुप्ता।

भास्कर न्यूज | हिसार

मानवीयसभ्यता में जब एकात्मता का भाव आता है तो संपूर्ण सृष्टि में सब कुछ मेरा ही नजर आता है। यह मनो का मेल है और एकात्मता ही मनुष्य सृष्टि के जीवन का आधार है। यह विचार पंचनद शोध संस्थान अध्ययन के निदेशक एवं माखन लाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.बीके कुठियाला ने हिसार केंद्र की ओर से आयोजित विचार गोष्ठी में रखे।

एकात्मता सामाजिक रचना के लिए नागरिक के दायित्व विषय पर ब्लूमिंग डेल्स स्कूल में आयोजित गोष्ठी में प्रो. ऋषि गोयल, प्रो. केसी अरोड़ा, डाॅ. कुलदीप शर्मा डाॅ. कमल गुप्ता विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। प्रो. कुठियाला ने कहा कि राष्ट्रीय एकता का प्रदर्शन तो राष्ट्रगान गाते समय और तिरंगा लहराते समय भी हो जाता है, लेकिन राष्ट्रीय एकात्मता के दर्शन नहीं होते। प्रो. कुठियाला ने बताया कि एकात्मता का अर्थ है जब समाज के सभी वर्गों में उस भाव का निर्माण हो कि हम सब एक हैं और हम सब में उसी एक परमात्मा का अंश है। एक का दुख सभी का दुख है और एक का सुख सभी का सुख है। कुठियाला ने कहा कि आज राष्ट्रीय एकात्मता की बहुत आवश्यकता है। प्रकृति के संबंध में उन्होंने कहा कि प्रकृति का आवश्यकता के अनुसार दोहन होना चाहिए शोषण नहीं होना चाहिए। उन्होंने बताया कि यूरोप, अमेरिका आदि विकसित कहे जाने वाले देशों ने प्रकृति का इतना शोषण किया कि आज प्राकृतिक आपदा को सबसे अधिक वही झेल रहे हैं।

प्रकृति के साथ भी हमारा संबंध एकात्मता का होना चाहिए। यह पेड़, नदियां, वन संपदा, जीव-जंतु, पशु-पक्षी हमारे हैं। प्रकृति हमारी आवश्यकता तो पूरी कर सकती है, लेकिन लालच को पूरा नहीं कर सकती। इस अवसर पर प्रो. आर. गोयल ने पंचनंद शोध संस्थान के संदर्भ में जानकारी दी। पंचनंद के संस्थापक सदस्य डॉ. कमल गुप्ता ने प्रो. बी. के कुठियाला को स्मृतिचिह्न भेंट कर सम्मानित किया।