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भागवत कथा सुनने से चौमुखी विकास होता है : मदन गोपाल

7 वर्ष पहले
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अग्रसेनभवन में तायल परिवार की तरफ से आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन बुधवार को संत मदन गोपाल महाराज ने वामन अवतार के बारे में बताया। उन्होंने वामन का अर्थ बताया लोभ नाश। मनुष्य को लोभ और क्रोध से सदैव आसक्त करके परमात्मा दूर रखता है। इसलिए वामन अवतार कथा लोभ नाश की कथा है।

महाराज ने कथा सुनाते हुए कहा कि जब राजा बली से परेशान होकर देवता भगवान विष्णु के पास और अपनी व्यथा सुनाई। इस पर विष्णु भगवान ने वामन (बाल ब्राह्मण) रूप धारण कर राजा बली के यज्ञ के समय पहुंचे। दान पीठिका पर बैठे राजा बली ने वामन भगवान को बुलाया और कहा कि मांग लो जाे मन में हो। लेकिन पास ही खड़े गुरु शुक्राचार्य ने राजा को दान देने से मना करते हुए कहा कि ये कोई सामान्य बालक नहीं हैं ये साक्षात विष्णु हैं। ये आपको ठगने के लिए आए हैं।

इस बात को सुनकर राजा ने कहा कि यदि ये विष्णु हैं तो और भी सौभाग्य की बात है कि विष्णु स्वयं ही मुझसे कुछ मांगने आए हैं। दान देने से पहले वामन भगवान ने राजा से कहा कि आप पहले रक्षा सूत्र बंधवाकर पहले संकल्प ले फिर मैं कुछ मागूंगा इसके बाद भगवान ने कहा कि मुझे केवल ढाई कदम जमीन चाहिए। इस बात को सुनकर राजा ने कहा कि ठीक है नाप लो। भगवान ने दो कदम में ही सारी धरती नाप ली फिर कहा राजन अब मैं अपना कदम कहां रखूं। इस पर राजा ने कहा कि तीसरा पैर मेरे सिर पर रख लो। उसी समय राजा बली पाताल लोक चले गए और भगवान उनके दरवान बन वहीं रहने लगे। इसके बाद महाराज ने कहा कि भागवत कथा सुनने से जीव का चौमुखी विकास होता है ओर जीवन सुंदर एवं दर्शनीय हो जाता है। पितृपक्ष में कथा सुनने से पितर प्रेत योनी से मुक्त होकर भागवत धाम चला जाता है।

अग्रसेन भवन में चल रही भागवत कथा के दौरान मौजूद श्रद्धालु।

कथा सुनाते संत मदन गोपाल महाराज।