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महिलाएं घर और बाहर कहीं भी सुरक्षित नहीं : वीना शर्मा

7 वर्ष पहले
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हिसार. प्रदेश में दिन प्रतिदिन हो रहे मानवाधिकारों के हनन के मामलों में लगातार इजाफा होता जा रहा है। इन मामलों के बढ़ने का सबसे बड़ा कारण पुलिस तथा सरकार रहे हैं। महिलाएं, बच्चे अन्य वंचित वर्ग के बाद दलित मानवाधिकार मामलों में सबसे ज्यादा पीडि़त हैं। इनसे बचने के लिए आम जनता में कानूनी पहलुओं की जानकारी होना बेहद आवश्यक है, ताकि सभी जागरूक व्यक्ति अपने मानवाधिकारों की रक्षा कर सके। यह बात ब्ल्यू बर्ड टूरिस्ट कॉम्प्लेक्स के सभागार में आयोजित ह्यूमन राइट लॉ नेटवर्क के सम्मेलन में उभर कर सामने आई। सम्मेलन का आयोजन कानूनविदों सामाजिक कार्यकर्ताओं को हाल में ही नए बने कानूनों तथा संशोधित अधिनियमों की जानकारी देने के लिए किया गया था।

सम्मेलन के आयोजक ह्यूमन राइट लॉ नेटवर्क के स्टेट कॉर्डिनेटर अधिवक्ता रजत कल्सन चंडीगढ़ पंजाब की स्टेट कॉर्डिनेटर अधिवक्ता वीना शर्मा थे। सम्मेलन में अधिवक्ता रजत कल्सन ने मानवाधिकारों पर चर्चा करते हुए कहा कि हिसार के डाबडा़ गैंग रेप केस दिल्ली के दामिनी रेप केस की घटनाओं के कारण केंद्र सरकार को पुराने आपराधिक कानूनों में संशोधन करना पड़ा तथा पोक्सो जैसे मजबूत कानून का जन्म हुआ। कल्सन ने कहा कि हरियाणा में मिर्चपुर कांड जैसे दलित उत्पीड़नों की वजह से अनुसूचित जाति जनजाति अधिनियम 1989 में बड़े बदलाव करने पड़े हैं। हरियाणा में भी प्रदेश सरकार को ऐसा मानवाधिकार हनन के चलते राज्य मानवाधिकार आयोग राज्य अनुसूचित जाति आयोग बनाना पड़ा। परंतु इसके बावजूद मानवाधिकार हनन के मामलों में बढ़ोतरी हुई है तथा ऐसे मामलों में दलितों की स्थिति सबसे बदतर है। चंडीगढ़ पंजाब की स्टेट कॉर्डिनेटर वीना शर्मा ने कहा कि प्रदेश की महिलाएं घर से बाहर के अलावा घर में भी सुरक्षित नहीं है। यहां तक की बच्चों को भी अपनों से सबसे ज्यादा खतरा बना हुआ है। घरेलू हिंसा अधिनियम से भी महिलाओं पर हिंसा के मामलों में काबू नहीं पाया जा सका है। कार्यक्रम में मुख्य तौर पर अधिवक्ता दयानंद शर्मा, अमित चौधरी, अनिल खाबड़ा, सूरजभान बौद्ध, अधिवक्ता वर्षा, प्रदीप अंबेडकर, राजेश राठी, सोनू बिसरवाल, चेतराम मौजूद रहे।