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टेंट फटा, तबीयत बिगड़ी फिर भी डटे धरने पर

7 वर्ष पहले
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ठिठुरतीसर्दी में खुले आसमान के नीचे नहरी पानी की मांग के लिए आमरण अनशन पर बैठे बुड़ाक के किसानों की लगातार तबीयत बिगड़ रही है। शनिवार को मौसम में बदलाव के कारण चली ठंडी हवाओं से प्रदर्शनकारियों का टेंट भी फट गया, लेकिन इसके बावजूद भी किसान अनशन से हटे नहीं।ग्रामीण पिछले 26 दिनों से साझा जल संघर्ष समिति के बैनर तले लघु सचिवालय के बाहर नहरी पानी की मांग धरने में पर बैठे हैं।

शनिवार अलसुबह से बदले मौसम, बरसात ठंडी हवाओं के चलते धरना स्थल का टेंट फट गया। जिसके बाद अनशनकारियों को नजदीक शेड के नीचे ले जाया गया। यहां किसान अब भी माह में 16 दिन नहरी पानी की मांग के लिए बैठे हैं।

इस मौके पर प्रधान वीरेंद्र पूनिया, जगदीश सरपंच, राजेश लौरा, राजेंद्र कस्वां, विजय कुमार पूर्व सरपंच, राजबीर श्योराण, कृष्ण सहारण, महेंद्र जांगड़ा, दीवान सिंह पूनिया, ताराचंद वर्मा, नरेंद्र थुराना, गोरधन कस्वां, बुल्ला जाखड़, आकेंद्र गोदारा पनिहार, आजाद भैरू, लाल सिंह केशु, छत्रपाल जांगड़ा के अितरिक्त भारी संख्या में किसान धरने पर मौजूद रहे।

सरकारकिसानों को लेकर गंभीर नहीं

किसाननेता रमेश और विरेंद्र पुनिया ने कहा कि एक तरफ जहां किसान वर्ग सर्दी, गर्मी, बरसात आदि प्राकृतिक मार को सहते हुए भी देश के लिए अन्न उगाकर देश की अर्थव्यवस्था में अपना अमूल्य योगदान दे रहे हैं, वहीं प्रदेश की भाजपा सरकार ने किसानों को सड़कों पर मरने के लिए छोड़ दिया है। सीएम खुला दरबार लगाकर लोगों की समस्याएं दूर करने की बात कर रहे हैं, वहीं सिंचाई मंत्री कहते हैं कि हम किसानों की समस्याओं को गंभीरता से ले रहे हैं। लेकिन उन्हें क्षेत्र के किसानों का दर्द दिखाई नहीं दे रहा।

अनशनजारी रहेगा

आमरणअनशन पर बैठे किसानों ने कहा कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होगी, वे अपना अनशन समाप्त नहीं करेंगे और यही धरना स्थल पर ही अपने प्राण त्याग देंगे। दूसरी तरफ किसानों ने आसपास के गांव रावलवास खुर्द, रावलवास कलां, भिवानी रोहिल्ला, गोरछी, गावड़, बासड़ा आदि में किसानों से संपर्क किया और उन्हें हक के लिए शुरू किए गए आंदोलन में सहयोग करने की अपील की। धरनास्थल पर आत्माराम नाई सुंडावास ने किसानों की शेविंग की और कहा कि जब तक धरना जारी रहेगा, वे यही पर निशुल्क सेवाएं देंगे।