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सरकारी बाड़े में पॉलिथिन खाकर मर रहे पशु

7 वर्ष पहले
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नगरनिगम के अस्थायी बाड़े पर राजनीति गरमा गई है। भाजपा व्यापार प्रकोष्ठ के प्रदेश सह-संयोजक बाबू लाल अग्रवाल, गोभक्तों और समाज सेवियों ने पहुंचकर अस्थायी बाड़े के इंतजामों को देखा तो दंग रह गए। इनका आराेप है कि बाड़े में करीब 300 से अधिक लावारिस पशु हैं। इनके खाने के लिए इंतजाम नहीं। भूख से करीब 50 पशु मर चुके हैं, हालांकि निगम के जिम्मेदार कह रहे हैं कि पांच पशु पॉलिथीन खाने से एक माह में मरे। वहीं, बाड़े में ठंड में पशुओं को बचाने के लिए टीन शेड का इंतजाम है और ही अलाव का। अब तक बाड़े पर खर्च हुई रकम की जांच कराने और अव्यवस्थाओं को दुरुस्त करने रविवार को शहर विधायक डाॅ. कमल गुप्ता के संज्ञान में मामला लाएंगे। जबकि उपायुक्त और शासन स्तर पर भी शिकायत करने की बात कही है।

शनिवार की शाम करीब पांच भाजपा व्यापार प्रकोष्ठ के सह संयोजक जब धान्सू रोड स्थित अस्थायी बाड़े में पहुंचे तो करीब आठ एकड़ में फैले बाड़े में तमाम अव्यवस्थाएं मिली।

बाबूलाल अग्रवाल के मुताबिक यहां किसी कर्मचारी ने 300 लावारिस पशु बताए तो किसी ने 400। हालांकि इतना तय था कि निगम बाड़े में अभी तक सांड़ ही छोड़े जाने का दावा करता था, जबकि यहां गाय भी मिली। बाड़े के परिसर में गंदगी के अलावा पॉलीथिन के ढ़ेर लगे हुए थे। आरोप लगाते हुए कहा कि जाड़े से बचाने के लिए टीन शेड अभी तक नहीं बना। जबकि निगम बाड़े पर 29 लाख रुपये खर्च करने का इस्टीमेट तैयार किया था। उन्होंने पशुओं को ठंड से राहत दिलाने के लिए अस्थायी बाड़े में त्रिपाल के इंतजाम के लिए 50 हजार रुपये भी इकट्ठे कराए। इन रुपयों से निगम की ओर से रविवार को पशुओं के लिए त्रिपाल डलवाएंगे। इस दाैरान मौके पर गो सेवक अनिल कुंडू, सेक्टर 14 के समाज सेवी गंगाधर बंसल, दीपक अग्रवाल, मनीष अग्रवाल आदि मौजूद रहे।निगम को सामाजिक व्यक्तियों और संगठनों की ओर से जो मदद मिल रही है, उसका लेखा-जोखा कहीं दर्ज नहीं हो रहा है। यह आरोप इन भाजपाइयों ने लगाया है। कहते हैं कि जो मदद शहर की जनता कर रही है, निगम उसे अपने खाते में दिखा देता है।

अतिक्रमण प्रभारी अस्थाई बाड़े के इंचार्ज महेंद्र सैनी ने बताया कि मैं शिकायत मिलने पर मौके पर गया था। बाड़े के अंदर पॉलीथिन हैं, उनकी सफाई के लिए काम करेंगे। जहां तक पशु मरने की बात है, वह अधिकारी ही बता पाएंगे।