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भगवान को भाव से प्राप्त कर सकते हैं : शास्त्री
जयश्रीराम महिला संकीर्तन मंडल की ओर से कुंजलाल गार्डन स्थित जय श्रीराम प्रभात फेरी मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन मंगलवार को आचार्य सुभाष कृष्ण शास्त्री ने कहा कि भगवान को पाने के लिए कठिन परिश्रम की आवश्यकता नहीं है। तीन सीढ़ी हैं-पहला सच्चा विश्वास, दूसरा संबंध तीसरा समर्पण।
जब जीव परमात्मा को पूरे विश्वास और लग्न से जपता है तो उसका संबंध परमात्मा से जुड़ जाता है और जब संबंध जुड़ता है तो अपने आप ही समर्पण हो जाता है और समर्पण से परमात्मा और जीव एक हो जाते हैं। उन्होंने ध्रुव चरित्र का वर्णन करते हुए बताया कि भगवान को पाने के लिए किसी विशेष उम्र की आवश्यकता नहीं है। जीव जब चाहे परमात्मा को पा सकता है। भगवान को पाने के लिए किसी डिग्री, किसी जाति, किसी रूप, किसी धन की आवश्यकता नहीं है। भगवान को केवल भाव से प्राप्त किया जा सकता है। जो जीव भगवान का बन जाता है उसके लिए सभी मर्यादाएं समाप्त हो जाती है। पंचयज्ञ करने से जीव को नरकों की यातना नहीं भोगनी पड़ती। पहला यज्ञ है- गऊ ग्रास, दूसरा यज्ञ है- कुत्ते की रोटी, तीसरा यज्ञ है-कीड़े मकोड़े, पक्षियों को भोजन देना। चौथा यज्ञ है- अग्नि में पांच आहुति देना। पांचवां यज्ञ है-भूखे को भोजन कराना। मंडल की प्रधान दर्शना चाणना ने बताया कि कथा में वीरभान भुटानी, सुदेश गाबा, सरोज मदान,पुष्पा छाबड़ा, राज झंडई, राज सरदाना अतिथि के रूप में उपस्थित हुए। सभी अतिथियों को आचार्य सुभाष कृष्ण शास्त्री ने स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया।
सुभाष कृष्ण शास्त्री।
कुंजलाल गार्ड में मंगलवार को श्रीमद्भावत कथा का श्रवण करते श्रद्धालु।