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काट कर पेड़ इंसान क्यों खुद खुश हो रहा है…
कलयुगकी रामलीला में अजब तमाशा देखा, बाघ को मृग के सामने गिड़गिड़ाते देखा, रावण ने राम को हाईटेक तरीके से संदेश भेजा, इस महंगाई के युग में सीता संग मेरी मंदोदरी भी ले जा। वीरेंद्र कौशल ने जहां महंगाई पर वार किया। वहीं कवियों ने कविताओं के माध्यम से बिगड़ते पर्यावरण पर चिंता जाहिर करते हुए जागरूक भी किया।
वृक्षमित्र पर्यावरण बचाओ समिति की मासिक काव्य गोष्ठी रविवार को अशोक मोनालिसा की अध्यक्षता में टाउन पार्क में आयोजित की गई। मुख्य अतिथि के रूप में गजलकार महेंद्र जैन ने शिरकत की। जय भगवान यादव ने हिंदी को देश की मर्यादा से जोड़ते हुए कहा हिंदी है हमारी राजभाषा, देश है हिंदुस्तान, गौरवशाली है इतिहास इसे जाने संपूर्ण जहान। वहीं हांसी से आई हिना बांग ने मां की महत्ता बताते हुए कहा कि प्यारी मां मुझको तेरी दुआ चाहिए, तेरे आंचल की ठण्डी हवा चाहिए, सारी दुनिया ने मुझको सताया है मां, तूने फिर भी मुझे गले लगाया है मां। मुख्य अतिथि महेंद्र जैन ने कहा कि साहित्यकारों को हिंदी के प्रसार और प्रचार में योगदान देना चाहिए। उन्होंने बिगड़ते पर्यावरण पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि क्यों प्रदूषण बना है जरा सोचिए, इसमें किसकी खता है जरा सोचिए, काट कर पेड़ खुद ही ये इंसान क्यों खुद खुश हो रहा है जरा सोचिए।
काव्य गोष्ठी
वृक्षमित्र पर्यावरण बचाओ समिति की मासिक गोष्ठी में शामिल कवि खुशवीर मोठसरा, ओमप्रकाश शर्मा, ऋषि सक्सेना, रमेश तनेजा, उमेद सिंह, पीए कौशिक अन्य।