पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • बड़े भाग्य से मनुष्य शरीर मिलता है : संतोषी माता

बड़े भाग्य से मनुष्य शरीर मिलता है : संतोषी माता

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
मनुष्ययोनि कर्म योनि है। बड़े भाग्य से मनुष्य शरीर मिलता है। इसमें मनुष्य अपने आप को जैसा बनाना चाहे, वैसा ही बना सकता है। बार-बार जन्म बार बार मृत्यु के आवागमन से छुटकारा भी मनुष्य योनी में ही संभव है। यह ज्ञान महामंडलेश्वर संतोषी माता ने मां संतोषी आश्रम में गुरुवार को कथा के अंतिम दिन पर श्रद्धालुओं को दिया। उन्होंने बताया कि सनातन धर्म में पंचदेव पूजा उपासना आवश्यक कही गई है। इसलिए भक्त गणेश, ब्रह्मा, विष्णु, महेश, मां भगवती सूर्यदेव की पूजा उपासना करते हैं। उन्होंने कहा कि यज्ञ देना प्रकार के होते हैं। द्रव्य यज्ञ ज्ञान यज्ञ। वृहत्मुख से निकलने वाले को ज्ञानयज्ञ कहते हैं, जबकि अग्नि मुख से निकलने वाले को द्रव्य यज्ञ। इन दोनों ही यज्ञों के द्वारा भक्तगण देवताओं को भोजन कराते हैं। उन्होंने कहा की भूल गलती होना बड़ी बात नहीं है, लेकिन इनका आभा होने पर उनको दबाना या छुपाना पाप है। ऐसे पाप का प्रायश्चित तभी होगा जब पाप करने वाला यह दृढ़ निश्चय करे कि वह दोबारा ऐसा नहीं करेगा सत्य मार्ग पर चलेगा। माता श्री ने कथा को विश्राम देने से पहले समझाया कि कथा श्रवण का लाभ तभी मिलता है जब कथा श्रद्धा भक्ति भाव से श्रवण की जाए। कथा सुनने मात्र से उद्धार हो जाएगा, ऐसा कुछ नहीं है। कथा का भाव भक्त के दिल दिमाग में आने से ही लाभ प्राप्त होगा। उन्होंने कहा कि दुराचारी से दुराचारी पापी से पापी अपने दुराचार को छोड़कर भगवान शिव की शरण में चला जाए तो उसके सभी पाप क्षमा हो जाते हैं। सत्संग में चरणदास बिंदल विक्रम जिंदल मुख्य अतिथि थे, जिन्होंने माता श्री को व्यास पीठ पर माल्यार्पण करके स्वागत किया। ट्रस्ट के सचिव राजमल काजल ने माता श्री शक्ति सत्संग सभा के पदाधिकारियों का धन्यवाद किया।

माॅडल टाउन स्थित मां संतोषी मंदिर में कथा करती संतोषी माता।