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भजन करने की कोई उम्र नहीं होती : रोहित कृष्ण
बैंककॉलोनी में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन मंगलवार को मेहंदीपुर बालाजी से पधारे आचार्य रोहित कृष्ण ने ध्रुव के बारे में बताते हुए कहा कि ध्रुव ने पांच साल की आयु में ही घर छोड़कर वन में तपस्या करने चले गए और भगवान से मिलकर परम पद प्राप्त किया। आचार्य ने बताया की भजन करने की कोई उम्र नहीं होती है। इसके बाद आचार्य ने प्रह्लाद चरित्र सुनाते हुए कहां कि पिता हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को मारने के लिए कई रास्ते अपनाए लेकिन प्रह्लाद का कुछ भी नहीं बिगाड़ सके। जो प्राणी भगवान को अपना लेता है उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। वामन की कथा सुनाते हुए आचार्य ने कहा कि जब गोविंद राजा बली के द्वार पर ब्राह्मण बनकर गए और राजा बली से तीन पग भूमि दान में मांगी तो राजा बली ने अपनी प्रतिज्ञा पूरी की। इससे खुश होकर भगवान ने उन्हें आशीर्वाद दिया कि अगले जन्म में तुम स्वर्ग के राजा बनोगे। कथा के दौरान उपाचार्य अनिल शास्त्री ने वेद मंत्रों से भगवान वामन की पूजा करवाई।
रोहित कृष्ण।
बैंक कॉलोनी में चल रही श्रीमद्भागवत कथा सुनते श्रद्धालु।